CBSE mandatory public disclosure: सभी सीबीएसई स्कूलों के लिए अंतिम अवसर, स्कूल की वेबसाइट पर टीचर से जुड़ी जानकारी देना होगा ब्योरा

CBSE mandatory public disclosure: सीबीएसई बोर्ड अपने सभी संबद्ध स्कूलों के लिए अपनी वेबसाइट बनाने और उस पर टीचरों की जानकारी डालने को अनिवार्य कर दिया है। बोर्ड ने इसके लिए सभी स्कूलों को 15 फरवरी 2026 तक का समय दिया है। नियम न मानने पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

अपडेटेड Jan 13, 2026 पर 2:36 PM
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बोर्ड की ओर से ये सर्कुलर सोमवार, 12 जनवरी 2026 को जारी किया गया था।

UPSC Exams face authentication: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे सभी उम्मीदवारों की पहचान करने के लिए एआई सक्षम तकनीक का सहारा लेगा। आयोग की सभी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होने वाले सभी उम्मीदवारों के लिए फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य करने का फैसला किया है। इससे संबंधित पायलट प्रोजेक्ट गुरुग्राम में किया गया है। इसमें प्रति उम्मीदवार मात्र 8-10 सेकेंड का समय लगा। यह कदम परीक्षा सुरक्षा और दक्षता में सुधार करेगा। बोर्ड की ओर से ये सर्कुलर सोमवार, 12 जनवरी 2026 को जारी किया गया था।

बोर्ड ने अपने सभी मान्यता प्राप्त या मान्यता की इच्छा रखने वाले स्कूलों को वेबसाइट बनाने और टीचरों की जानकारी, उनकी शैक्षिक योग्यता और डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने का आखिरी मौका दे रहा है। बोर्ड ने कहा कि यह अनिवार्य पब्लिक डिस्क्लोजर का हिस्सा है। सेंट्रल बोर्ड ने इस संबंध में पहली बार 5 मार्च, 2021 को एक सर्कुलर जारी किया था, और नियमों का पालन करने के लिए 21 मई, 2021 को एक रिमाइंडर भेजा था।

बोर्ड के निर्देशानुसार, स्कूलों को कम से कम साल में एक बार 15 सितंबर को अपनी वेबसाइट पर एक सालाना रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी। इसमें नाम, पता, ईमेल, फोन नंबर, मान्यता का स्टेटस, मान्यता की अवधि, सहित स्कूल की बुनियादी जानकारी, शैक्षिक कैलेंडर, टीचरों की संख्या, योग्यता, खेल उपलब्धियां, पीटीए आदि का ब्योरा देना होगा। स्कूल में छात्र और टीचर का अनुपात 30:1 से अधिक नहीं होना चाहिए और प्रिंसिपल, काउंसलर और फिजिकल एजुकेशन टीचर के अलावा हर सेक्शन पर 1.5 टीचर होना अनिवार्य है।

बोर्ड ने कहा कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद, कई मान्यता प्राप्त स्कूलों ने कार्यरत वेबसाइट नहीं बनाई है। कुछ स्कूलों की वेबसाइट हैं, लेकिन उन्होंने अनिवार्य पब्लिक डिस्क्लोजर के तहत जरूरी जानकारी और डॉक्यूमेंट्स या तो अपलोड नहीं किए हैं या आंशिक रूप से अपलोड किए हैं। बोर्ड ने अपने एक ताजा सर्कुलर में कहा, “कुछ मामलों में, यह देखा गया है कि स्कूलों ने जरूरी जानकारी/डॉक्यूमेंट्स अपलोड तो कर दिए हैं, लेकिन इन डॉक्यूमेंट्स के लिंक एक्टिव नहीं हैं। कुछ स्कूलों ने बताई गई जानकारी/डॉक्यूमेंट्स अपलोड तो कर दिए हैं, लेकिन उसका आइकन/लिंक उनके मेन होम पेज पर साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहा है।”

ऐसे सभी स्कूलों के लिए बोर्ड आखिरी मौका दे रहा है, जो अभी तक निर्देशों का पालन नहीं कर पाए हैं। उन्हें सर्कुलर के अनुसार 30 दिनों के अंदर सभी बताई गई जानकारी और डॉक्यूमेंट्स को “स्पष्ट और पूरी तरह से” अपलोड करने के लिए कहा गया है। ऐसा न करने पर बोर्ड नियमों के अनुसार जरूरी कार्रवाई करेगा और जुर्माना लगाएगा।

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