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JoSAA Counselling 2026: सोशल मीडिया में उठी 15 जुलाई की डेडलाइन बढ़ाने की मांग, जानें क्यों छात्रों को नाकाफी लग रही जोसा राहत

JoSAA Counselling 2026: आईआईटी रुड़की के 15 जुलाई तक जोसा काउंसलिंग नियमों के अनुसार संशोधित मार्कशीट उपस्थित करने की छूट पर छात्रों ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। साथ ही, छात्रों ने डेडलाइन बढ़ाने की मांग की है। आइए जानें इस बारे में छात्रों का क्या तर्क है

MoneyControl Newsअपडेटेड Jun 09, 2026 पर 4:42 PM
JoSAA Counselling 2026: सोशल मीडिया में उठी 15 जुलाई की डेडलाइन बढ़ाने की मांग, जानें क्यों छात्रों को नाकाफी लग रही जोसा राहत
छात्रों को 15 जुलाई तक नंबर की शर्त पूरी करने की डेडलाइन काफी नहीं लग रही है।

JoSAA Counselling 2026: जेईई एडवांस्ड में सफल, लेकिन सीबीएसई बोर्ड 12वीं की परीक्षा में 75% से कम नंबर पाने वाले छात्रों को जेओएसएए काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल होने की छूट तो मिल गई है। मगर, छात्रों को 15 जुलाई तक नंबर की शर्त पूरी करने की डेडलाइन काफी नहीं लग रही है। इसलिए वे यह समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

हाल ही में आईआईटी रुड़की ने 12वीं कक्षा में 75% से कम नंबर वाले जनरल, ओबीसी-एनसीएल और ईडब्लूएस श्रेणी के छात्रों को और 65% से कम नंबर पाने वाले एससी, एससी और पीडब्लूडी श्रेणी के छात्रों के लिए जोसा काउंसलिंग में शामिल होने की इजाजत दी थी। इससे जहां बहुत से छात्रों को राहत मिली, वहीं इससे यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि इस संशोधित व्यवस्था के असल हकदार छात्र कौन से होंगे। आईआईटी रुड़की ने कहा था कि ऐसे सभी छात्र सीट आवंटन प्रक्रिया में शामिल होकर अपनी जेईई रैंक के आधार पर चयन कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें न्यूनतम नंबरों से संबंधित जोसा काउंसलिंग के प्रवेश नियम के अनुसार अपनी संशोधित मार्कशीट 15 जुलाई तक देना अनिवार्य होगा। इसी शर्त के आधार पर उनका प्रवेश निर्भर करेगा।

इस घोषणा के बाद से सोशल मीडिया पर छात्रों की काफी तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। बहुत से छात्रों का कहना है कि नियमों में छूट कागजी तौर पर ठीक लग रही है, लेकिन 15 जुलाई की समय सीमा पूरा करना उनके लिए मुश्किल लग रहा है। छात्रों का कहना है कि अब भी कई बोर्ड में री-इवैल्युएशन प्रक्रिया और इम्प्रूवमेंट परीक्षाएं चल रही हैं। कुछ मामलों में इम्प्रूवमेंट परीक्षाएं ही मिड जुलाई में होती हैं। इससे उनके लिए रिवाइज्ड मार्कशीट को डेडलाइन से पहले उपलब्ध कराना संभव नहीं होगा।

यूपी बोर्ड 12वीं की परीक्षा में 72.2% नंबर पाने वाले एक छात्र रवि का कहना है कि उसके पास अपने नंबर सुधार कर पात्रता जरूरत को पूरा करने का कोई मौका नहीं है। वहीं, अन्य ने डेडलाइन बढ़ाने की मांग की है। एक अन्य छात्र लक्षित ने कहा कि री-इवैल्युएशन और सुधार परीक्षा का परिणाम 15 जुलाई के बाद आने का अनुमान है। इसलिए उसने आईआईटी रुड़की और जोसा अधिकारियों से अतिरिक्त समय मांगा है।

वहीं, कई यूजर ने 75% पात्रता नियम की समीक्षा की मांग की है। कुछ यूजर्स ने सुझाव दिया है कि जनरल, ओबीसी और ईडब्लूएस उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम अंक स्तर को 65%, जबकि एससी, एसटी और पीडब्लूडी उम्मीदवारों के लिए 55% करने की मांग की है। इन्होंने कोविड 19 महामारी का हवाला दिया है, जब एलिजिबिलिटी नियामों में विशेष परिस्थितियों में छूट दी गई थी। कई छात्रों के लिए यह मसला नंबरों की आवश्यकता से ज्यादा डेडलाइन का है। उनका तर्क है कि अब योग्य परीक्षार्थियों को दूसरा मौका देना मकसद है, तो विभिन्न बोर्ड परीक्षाओं, री-इवैल्युएशन प्रक्रिया और सुधार परीक्षाओं को देखते हुए डेडलाइन निर्धारित करनी चाहिए।

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