Netflix Scholarship: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज (IICT) और नेटफ्लिक्स ने क्रिएटिव फील्ड में नई और उभरती प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए स्कॉलरशिप देने की घोषणा की है। इसके तहत छह प्रोफेशनल प्रोग्राम में पंजीकरण कराने वाले 100 छात्रों को छात्रवृत्ति दी जाएगी। इससे पाठ्क्रम में 80% आर्थिक मदद मिल सकेगी। इनमें दो एक साल के डिप्लोमा प्रोग्राम और चार छह महीने के सर्टिफिकेट प्रोग्राम शामिल हैं। ये स्कॉलरशिप पूरे भारत के स्टूडेंट्स और काम करने वाले प्रोफेशनल्स के लिए उपलब्ध होंगी। स्कॉलरशिप और प्रोग्राम के बारे में अधिक जानकारी iict.org पर उपलब्ध है।
स्कॉलरशिप पहल के तहत आने वाले प्रोग्राम हैं इंटरैक्टिव कॉमिक्स और सीक्वेंशियल आर्ट्स में डिप्लोमा, विज़ुअल इफेक्ट्स मास्टरी में डिप्लोमा, वर्चुअल आर्ट डिपार्टमेंट कंटेंट क्रिएशन में सर्टिफिकेट, मीडिया टेक वर्कफ्लो में सर्टिफिकेट, आर्ट ऑफ कैरेक्टर एनिमेशन में सर्टिफिकेट, और ई-स्पोर्ट्स और गेमिंग मैनेजमेंट में सर्टिफिकेट।
भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस पहल की जानकारी साझा की। मंत्रालय की ओर से कहा गया कि इस सहयोग का मकसद भारत की क्रिएटिव टैलेंट पाइपलाइन को मजबूत करना और देश की 'ऑरेंज इकोनॉमी' की ग्रोथ में मदद करना है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह पार्टनरशिप भारत को कटिंग-एज कंटेंट क्रिएशन के लिए एक उभरते हुए वैश्विक हब के रूप में स्थापित करने में मदद कर सकती है। यह घोषणा 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेटफ्लिक्स के को-सीईओ टेड सारंडोस के बीच हुई बैठक के बाद हुई है।
मीटिंग के दौरान, प्रधानमंत्री ने भारत की कहानी कहने की समृद्ध परंपरा और क्रिएटिव टैलेंट के बड़े पूल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस टैलेंट का इस्तेमाल कंटेंट बनाने के लिए ग्लोबल हब के तौर पर भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए किया जा सकता है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के सेक्रेटरी और आईआईसीटी बोर्ड के चेयरमैन चंचल कुमार ने कहा कि भारत की क्रिएटिव इकॉनमी एक अहम मोड़ पर है, क्योंकि टेक्नोलॉजी कहानियों को बनाने के तरीके को लगातार बदल रही है।
नेटफ्लिक्स इंडिया स्टोरीटेलिंग इनिशिएटिव का मकसद एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) इकोसिस्टम में इंडस्ट्री से जुड़े स्किल्स के साथ कहानीकारों की अगली पीढ़ी को तैयार करके भारत की क्रिएटिव टैलेंट पाइपलाइन में इन्वेस्ट करना है। इस सेक्टर को भारत की 'ऑरेंज इकोनॉमी' का एक मुख्य ड्राइवर माना जाता है।