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UP Board Improvement Exam 2026: यूपी बोर्ड डाक विभाग को दे सकता है परीक्षा कॉपियों की सुरक्षा का जिम्मा, कंपार्टमेंट परीक्षा में लॉन्च किया पायलट प्रोजेक्ट

UP Board Improvement Exam 2026: यूपी बोर्ड छात्रों की बोर्ड परीक्षा की कॉपियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी डाक विभाग को सौंप सकता है। हाल ही में संपन्न हुई यूपी बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षा में बोर्ड ने इस संबंध में एक पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया। इसके बारे में और जानने के लिए नीचे दी गई रिपोर्ट पढ़ें

MoneyControl Newsअपडेटेड Jul 31, 2026 पर 12:40 PM
UP Board Improvement Exam 2026: यूपी बोर्ड डाक विभाग को दे सकता है परीक्षा कॉपियों की सुरक्षा का जिम्मा, कंपार्टमेंट परीक्षा में लॉन्च किया पायलट प्रोजेक्ट
यूपीएमएसपी ने आंसर शीट पहुंचाने के लिए भारतीय डाक विभाग के साथ पार्टनरशिप की है।

UP Board Improvement Exam 2026: हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा सुरक्षित और निष्पक्ष तरीके से कराने के साथ-साथ आयोजक संस्था की जिम्मेदारी बिना धांधली के कॉपियों की सुरक्षा की भी होती है। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) भविष्य में होने वाली यूपी बोर्ड की हाईस्कूल (10वीं) और इंटरमीडिएट (12वीं) की परीक्षा में बड़ा बदलाव कर सकता है। इस संबंध में परिषद ने हाल ही में संपन्न हुई यूपी बोर्ड कंपार्टमेंट/इंप्रूवमेंट परीक्षा 2026 में पायलट प्रोजेक्ट लॉन्च किया है।

परीक्षा सामग्री की सुरक्षा बढ़ाने के लिए एक नए कदम के तहत यूपीएमएसपी ने जिला कलेक्शन सेंटर से राज्य के प्राइमरी हब तक आंसर शीट पहुंचाने के लिए भारतीय डाक विभाग के साथ पार्टनरशिप की है। यह पायलट प्रोजेक्ट 28 जुलाई को हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट और इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षाओं के दौरान लॉन्च किया गया था। हिंदुस्तान टाइम्स समूह में प्रकाशित खबर के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत सभी 75 जिलों से आंसर शीट शुरू में उनके संबंधित कलेक्शन सेंटर पर भेजी गईं। जिन जिलों में कई परीक्षा केंद्र थे, वहां टीचर और डिपार्टमेंट के कर्मचारी इन जिला हब तक आंसर शीट पहुंचाने का काम मैनेज करते रहे। बोर्ड अधिकारियों ने बताया कि डाक विभाग ने जिला हब से राज्य के मुख्य कलेक्शन सेंटर, सरकारी इंटर कॉलेज (GIC), प्रयागराज तक सामान पहुंचाने का काम संभाला।

इस पहल की पुष्टि करते हुए, UP बोर्ड के सेक्रेटरी भगवती सिंह ने बताया कि यह पहली बार था जब डाक विभाग ने आंसर शीट के एक जिले से दूसरे जिले में ट्रांसपोर्ट का काम संभाला था। सिंह ने कहा, “पायलट पर रिपोर्ट मांगी गई है। अगर यह काम सफल रहा, तो हम अगले साल से सालाना हाई स्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए इस व्यवस्था को और बड़े पैमाने पर लागू करेंगे।”

परीक्षार्थियों की आंसर शीट को डिजिटल रूप में आगे भेजने से पहले जीआईसी प्रयागराज में स्कैन किया गया। इसके बाद इन्हें प्रयागराज, मेरठ और वाराणसी के मूल्यांकन केंद्रों पर भेजा जाएगा, जहां उनका मूल्यांकन किया जाएगा और अंक इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपलोड किए जाएंगे। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से एक जिले से दूसरे जिले में जाने के दौरान आंसर शीट के खोने या चोरी होने का खतरा कम हो जाएगा। इससे ट्रांसपोर्टेशन के लिए शिक्षक, विभाग के स्टाफ और सिक्योरिटी वालों को लगाने से जुड़े खर्च में भी कमी आने की उम्मीद है।

यह पहल मौजूदा ट्रांसपोर्ट व्यवस्था की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को दूर करती है। मार्च 2024 में, मुजफ्फरनगर में यूपी बोर्ड की आंसर शीट ले जा रहे एक टीचर की कथित तौर पर पुलिस एस्कॉर्ट ने हत्या कर दी थी। इस साल की शुरुआत में, ऐसी खबरें आईं कि स्टाफ बिना पूरी सुरक्षा के ई-रिक्शा, मोटरसाइकिल और स्कूटर से आंसर शीट ले जा रहे थे, जबकि सरकारी निर्देशों में खास सेफ्टी प्रोटोकॉल जरूरी थे।

28 जुलाई की कंपार्टमेंट/इंप्रूवमेंट परीक्षाओं के लिए कुल 42,078 कैंडिडेट ने पंजीकरण किया था, जिनमें से 39,543 शामिल हुए और 2,535 अनुपस्थित रहे। इसकी तुलना में, सालाना यूपी बोर्ड कक्षा 10 और 12 की परीक्षाओं में लगभग 8,000 केंद्रों पर 50 लाख से ज्यादा छात्र शामिल होते हैं।

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