UPSC Topper Zinnia Aurora: आमतौर पर माना जाता है कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा (CSE) की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को कई-कई घंटे पढ़ाई करना जरूरी होता है। बाहरी दुनिया से पूरी तरह से दूरी बनाना और हर शौक और मन बहलाने वाली चीजों को भूलना पड़ता है। लेकिन 2025 में यूपीएससी सीएसई 2025 में ऑल इंडिया रैंक 6 हासिल करने वाले जिनिया ऑरोरा ने इन सारी धारणाओं को गलत साबित किया है। उन्होंने अपने इस अटेंप्ट में खुद को थकाने वाले रुटीन के बजाए निरंतरता को चुना।
ब्रह्म मुहूर्त में सबसे मुश्किल विषय को साधें
हमारे शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त की विशेषता के बारे में बताया गया। इस समय में पढ़ाई करना सबसे अच्छा माना जाता है। जिनिया ने भी ये अहमियत समझी और सुबह 4 से 7 बजे तक सबसे मुश्किल टॉपिक या डीप स्टडी पर फोकस किया। इस समय दिमाग पूरी तरह फ्रेश रहता है। इस पहले सत्र के बाद, उन्होंने सुबह 7:00 बजे से 8:00 बजे के बीच रणनीतिक ब्रेक लिया। इस दौरान हल्की-फुल्की एक्सरसाइज और नाश्ता किया। उनकी सोच बिलकुल साफ है, सिर्फ सुबह जल्दी मत उठो। उन पहले तीन घंटों को हाई-फोकस वाले काम के लिए बचाकर रखो। इस समय न फोन चेक करना, अखबार पढ़ना या रिविजन नहीं करना है, इस दौरान बस उन सब्जेक्ट्स पर फोकस करो जिनसे सबसे ज्यादा डर लगता है।
पढ़ाई के लंबे घंटों के बीच छोटे ब्रेक रहे मददगार
जिनिया ने अपना पूरा दिन रैंडम पढ़ाई के बजाय डीप वर्क साइकल के हिसाब से बनाया। नाश्ते और सुबह के ब्रेक के बाद, सुबह 9:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक दूसरा लंबा स्टडी ब्लॉक निर्धारित किया। तीन घंटे का एक और डीप वर्क साइकल बनाए रखा। उन्होंने जानबूझ कर अपने समय को इस तरह मैनेज किया, क्योंकि उनके मुताबिक लगातार फोकस के लिए तीन घंटे का समय पर्याप्त था।
दोपहर के आस-पास जब उनका मनोबल कमजोर होने लगता था, तब उन्होंने दोपहर 12:00 बजे से 1:00 बजे तक अपना फोकस अखबार पढ़ने और करंट अफेयर्स पर कर दिया। इससे कोर सब्जेक्ट्स के भारी प्रेशर के बिना मोमेंटम बना रहा। इस स्मार्ट तरीके से उन्होंने कम एनर्जी वाले दिनों में भी प्रोडक्टिव बनाए रखा। इस चुनौतीपूर्ण दौर में दोपहर के समय वह कुछ खास करती हैं, जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता था। दोपहर 1:00 PM से 3:00 PM तक, वह आराम करने और खाने के लिए समय निकालती थी। यूपीएससी सीएसई की तैयार की लंबी यात्रा में टिके रहने के लिए शारीरिक और मानसिक सेहत पर जोर दिया।
शाम के समय गहरी पढ़ाई नहीं रिव्यू के लिए
शाम को जिनिया अपना फोकस रिविजन, टेस्ट एनालिसिस और अपने साथियों के साथ ग्रुप डिस्कशन पर लगाती थीं। उनका मानना था कि बिना फीडबैक के अकेले पढ़ना अधूरी तैयारी है। जब वह अकेली होती थी, तो वह इस समय का इस्तेमाल मैपिंग एक्सरसाइज, जियोग्राफी रिविजन या एजुकेशनल पॉडकास्ट सुनने के लिए करती थी।
दबाव नहीं, लय कायम रखना है जरूरी
जिनिया कहती हैं शरीर और दिमाग एक सीमा तक ही फोकस कर सकता है। नियमित रूप से 7 से 8 घंटे की पढ़ाई अपने आम में पर्याप्त है। हालांकि, जिनिया ने परीक्षा के आखिरी महीने में 11 से 12 घंटे का शेड्यूल भी रखा। लेकिन ये सिर्फ आखिरी घंटे के लिए था। उन्होंने मॉक टेस्ट का इस्तेमाल स्कोर चेक करने के साथ-साथ रोज के सिलेबस के लिए एक रोडमैप के तौर पर भी किया। इससे उन्हें यह पता चलता रहा, कि किस क्षेत्र में उन्हें ध्यान देने की जरूरत है।
इंटरव्यू और एथिक्स के लिए बनाई ये रणनीति
इंटरव्यू और एथिक्स में शानदार प्रदर्शन के लिए उन्होंने एक खास रणनीति पर फोकस किया। उन्होंने किताबों से काफी मदद ली और उसके बारे में लिखते समय सरल भाषा का इस्तेमाल किया। साथ ही उन्होंने गहराई से आकलन किया। उन्होंने केस स्टडी को भावनात्मक जुड़ाव के साथ लिखा। उसमें उन्होंने फिलोसॉफी और मैनेजमेंट की थ्योरी का जिक्र किया और अपनी आम जिंदगी के अनुभवों से भी उदाहरण लिए। इंटरव्यू के लिए उन्होंने अपने एप्लिकेशन फॉर्म पर फोकस रखा। इसके अलावा रोजाना की खबरों की हेडलाइन का संदर्भ समझने पर जोर दिया। इसके लिए नीति आयोग के पेपर और भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट सेक्रेटरी की किताब भी पढ़ी। उन्होंने पढ़ाई में कमी नहीं की, बल्कि उसका तरीका बदला और स्मार्ट सट्रैटेजी अपनाई।