Bihar Chunav: 'Gen-Z उनकी बात क्यों सुनेगा', राहुल गांधी को लेकर प्रशांत किशोर का बड़ा बयान

Bihar Assembly Elections 2025 : न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि जनरेशन Z कोई एकजुट ग्रुप नहीं है जो राहुल गांधी के कहने पर एकजुट होकर काम करे। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही राहुल गांधी बार-बार “वोट चोरी” के आरोप लगाते हैं और युवाओं से लोकतंत्र की रक्षा की अपील करते हैं, लेकिन इसका राज्य के युवाओं पर खास असर नहीं दिखता

अपडेटेड Nov 09, 2025 पर 10:00 PM
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Bihar Chunav 2025: चुनाव रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने बड़ा बयान दिया है।

Bihar Assembly Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव में दूसरे चरण के प्रचार अभियान आज थम गया है। पहले चरण में बंपर वोटिंग के बाद अब दूसरे चरण के मतदान और नतीजों का इंतजार है। बिहार के नतीजे 14 नवंबर को आएगा। इस बीच बिहार विधानसभा चुनाव जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का बिहार के युवाओं, खासकर Gen-Z पर कोई खास असर नहीं है। उन्होंने कहा कि इस पीढ़ी को न तो राज्य की असली स्थिति की पूरी जानकारी है और न ही उसकी जमीनी मौजूदगी मजबूत है।

राहुल गांधी के प्रभाव पर प्रशांत किशोर

न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि जनरेशन Z कोई एकजुट ग्रुप नहीं है जो राहुल गांधी के कहने पर एकजुट होकर काम करे। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही राहुल गांधी बार-बार “वोट चोरी” के आरोप लगाते हैं और युवाओं से लोकतंत्र की रक्षा की अपील करते हैं, लेकिन इसका राज्य के युवाओं पर खास असर नहीं दिखता। प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गांधी को बिहार की कितनी समझ है? वे यहां आते हैं, थोड़ी देर घूमते हैं, मीडिया में बयान देते हैं और फिर चले जाते हैं।”


उन्होंने आगे कहा, “जब बिहार के लोग ही उनकी बात नहीं सुन रहे, तो जनरेशन ज़ेड क्यों सुनेगी? बिहार में जनरेशन ज़ेड कोई एकजुट समूह नहीं है जो किसी के कहने पर या उनके विचारों पर चल पड़े।” किशोर ने यह भी कहा कि नेपाल में जनरेशन ज़ेड के विरोध प्रदर्शनों के बाद लोग बिहार में भी ऐसी स्थिति की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने साफ किया कि बिहार में ऐसी किसी आंदोलन जैसी संभावना नहीं दिखती।

प्रशांत किशोर ने कहा, “बिहार एक बेहद राजनीतिक राज्य है, यह बैंगलोर जैसा नहीं है। यहां लोगों के पास कपड़े, खाना या नौकरी भले न हो, लेकिन राजनीति के प्रति जोश बहुत है। लोग अपना काम छोड़कर भी दिन-रात राजनीति की बातें करते हैं। लेकिन मुझे नहीं लगता कि किसी के कहने भर से यहां कोई क्रांति आ जाएगी।” उन्होंने आगे कहा कि बिहार के चुनावों में युवा जरूर अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन उनकी प्राथमिक चिंता बेरोज़गारी और पलायन है, न कि किसी नेता का आह्वान।

बेरोजगारी पर कही ये बात 

प्रशांत किशोर ने कहा, “20 से 30 साल के बीच के युवा बेरोजगारी की वजह से गंभीर मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। उन्हें रोज़गार की तलाश में बिहार छोड़कर बाहर जाना पड़ता है और वहां कड़ी ज़िंदगी जीनी पड़ती है। यह राज्य की सबसे बड़ी समस्या है। आप उन्हें जेन ज़ी कहें, युवा कहें या मिलेनियल - बात एक ही है।” उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा चुनाव में कांग्रेस की कोई बड़ी भूमिका नहीं है। पार्टी की मौजूदगी केवल सीमांचल क्षेत्र तक सीमित है, बाकी बिहार में उसका कोई खास प्रभाव नहीं बचा है।

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