Bihar Elections: पीएम मोदी का दौरा और बड़ी सौगात, मगध पर क्यों है बीजेपी की नजर...जानें पूरा समीकरण

Bihar Assembly Elections : पीएम मोदी की नजर पूरी तरह से मगध पर बनी हुई है, क्योंकि मगध बीजेपी ही नहीं बल्कि पूरे एनडीए कुनबे के लिए सबसे कमजोर कड़ी मानी जाती है। बक्सर, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, रोहतास, और कैमूर जैसे जिलों में फैली ये सीटें एनडीए गठबंधन के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी हैं

अपडेटेड Aug 22, 2025 पर 8:05 PM
मगध बीजेपी ही नहीं बल्कि पूरे एनडीए कुनबे के लिए सबसे कमजोर कड़ी मानी जाती है।

Bihar Assembly Elections : बिहार विधानसभा चुनाव में सियासी रण के लिए तैयारी जोरो -शोरो से चल रही है। सूबे में सियासी शतरंज की बिसात बिछाई जा चुकी है और राजनीतिक मोहरों को खेल में लाया जा रहा है। वहीं इस सियासी रण को साधने के लिए पीएम मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए भी बिहार के लिए हर रोज कोई न कोई ऐलान कर रही है। वहीं शुक्रवार को पीएम मोदी ने बिहार के गया में एक दिवसीय दौरे पर 13000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली 14 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन तमाम परियोजनाओं के साथ ही पीएम मोदी और एनडीए ने कई चुनावी समीकरण को भी साधा।

एनडीए के लिए कमजोर कड़ी

दरअसल पीएम मोदी की नजर पूरी तरह से मगध पर बनी हुई है, क्योंकि मगध बीजेपी ही नहीं बल्कि पूरे एनडीए कुनबे के लिए सबसे कमजोर कड़ी मानी जाती है। बक्सर, औरंगाबाद, गया, जहानाबाद, रोहतास, और कैमूर जैसे जिलों में फैली ये सीटें एनडीए गठबंधन के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी हैं। पिछले यानी 2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को इस क्षेत्र में करारी हार का सामना करना पड़ा था, जहां 26 में से महज 6 सीटें ही उसके खाते में आई थीं। गयाजी में 10 विधानसभा में से 5 पर जीत हासिल हुई थी। औरंगाबाद में 6 विधानसभा में से एक पर भी एनडीए का खाता नहीं खुला था। जहानाबाद में 3 विधानसभा सीटें और अरवल में 2 विधानसभा सीटों पर एनडीए का खाता भी नहीं खुला था। वहीं इस बार बीजेपी-जेडीयू गठबंधन ने इन सीटों को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है।

इन वोटरों का दबदबा


बता दें कि मगध क्षेत्र में दलित, कुशवाहा, यादव, और अति पिछड़ा वर्ग के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 2020 में महागठबंधन को इस झेत्र में काफी कामयाबी मिली थी। राजद-कांग्रेस-वामदल गठबंधन ने इन वर्गों के समर्थन से इस क्षेत्र में दबदबा बनाया था। वहीं, चिराग पासवान ने जेडीयू को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसके चलते एनडीए का प्रदर्शन मगध और शाहाबाद में विशेष रूप से खराब रहा। मगध, सीपीआई (एमएल) की मजबूत प्रभाव क्षेत्र में रहा है। यहां दलित और अतिपिछड़ा वर्ग का अच्छी खासी जनसंख्या है और उसमें किसी भी अगड़ी जाति का कॉम्बिनेशन मिलते ही जीत की गारंटी बन जाती है। इसी वजह से पिछले दो विधानसभा और 2024 लोकसभा चुनाव में यहां बीजेपी और एनडीए ने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था।

ऐसे में माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मगध में 22 अगस्त हुआ ये दौरा वहां पर एनडीए के कार्यकर्ताओं और नेताओं को चुनाव से जोश से लबरेज करने की एक बड़ी कोशिश है।

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