बिहार में एक बाद एक हत्या हो रही है और इस बार तो खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के एक नेता की गुरुवार को खगड़िया में दिनदहाड़े मौत के घाट उतार दिया गया। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक नेता की पहचान राजकिशोर निषाद के रूप में हुई है। हमलावरों के एक गुट ने कथित तौर पर लोहे की रॉड से पीट पीट कर उनकी हत्या कर डाली।
पटना में BJP नेता सुरेंद्र केवट की दो दिन पहले ही दो बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर हत्या की थी, इसके चार दिन बाद अब ये एक और वारदात हुई है। हमले में 52 साल के केवट को चार गोलियां लगी थीं। उन्हें पटना AIIMS ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
इस बीच, एक और घटना में, रोहतास में आज JDU प्रखंड नेता के पिता की संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई। सासाराम के तिलौथू प्रखंड के अमरा गांव में JDU प्रखंड अध्यक्ष राकेश कुमार उर्फ भोला के पिता पारसनाथ सिंह की हत्या कर दी गई।
पुलिस के अनुसार, पारसनाथ सिंह ने दो महीने पहले गांव में एक गौशाला बनवाई थी, जहां वह अपने मवेशियों की देखभाल के लिए रहते थे और कभी-कभी ऑटो-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करता था। गुरुवार तड़के, ग्रामीणों ने सिंह को गौशाला के अंदर मृत पाया और जगह-जगह खून बिखरा हुआ था।
एक और घटना में, अज्ञात बदमाशों ने आज सुबह पटना के एक अस्पताल में गोलीबारी की, जिसमें पैरोल पर बाहर आए और पारस HMRI अस्पताल में इलाज करा रहे चंदन मिश्रा नाम के अपराधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
हमलावरों की पहचान उस इलाके में एक रियल एस्टेट फर्म से जुड़े बिल्डरों के रूप में हुई है। हमलावर कथित तौर पर पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
चुनावी साल में लगातार हो रही हत्याएं नीतीश कुमार सरकार के लिए एक चुनौती बन गई है, क्योंकि वह बिहार की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर विपक्ष के बयान का मुकाबला करने के लिए संघर्ष कर रही है।
RJD-कांग्रेस गठबंधन चुनावों से पहले कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर BJP-JDU गठबंधन को घेरने की कोशिश कर रहा है, और पटना में अपने घर के बाहर प्रमुख कारोबारी और बीजेपी नेता गोपाल खेमका की हत्या के बाद ये राजनीतिक हमले तेज हो गए हैं।