Tamil Nadu Election 2026: स्टालिन परिवार की जीत की राह का स्पीड ब्रेकर विजय फैक्टर! सुपरस्टार और TVK की पॉलिटिक्स को समझिए
इस पूरे चुनाव को और दिलचस्प बना रही है अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK। उनकी एंट्री से वोट कटने का खतरा बढ़ गया है। माना जा रहा है कि अगर TVK अच्छा वोट शेयर ले जाती है, तो बड़े दलों की जीत का अंतर काफी कम हो सकता है और सीधी टक्कर और भी रोमांचक बन सकती है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि इसका सीधा नुकसान DMK को ही उठना पड़ सकता है
Tamil nadu Election: स्टालिन परिवार की जीत की राह का स्पीड ब्रेकर विजय फैक्टर! सुपरस्टार और TVK की पॉलिटिक्स को समझिए
नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख खत्म हो चुकी है, और अब 23 अप्रैल को तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है। इसी चुनाव के बाद राज्य में 17वीं विधानसभा का गठन होगा। इस बार चुनाव इसलिए भी दिलचस्प हो गया है, क्योंकि फिल्म अभिनेता से नेता बने जोसेफ सी. विजय यानी विजय थलापति की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) भी मैदान में उतर आई है। माना जा रहा है कि TVK की एंट्री से बड़े दलों की जीत का अंतर कम हो सकता है और हालात ऐसे बन सकते हैं कि किसी एक पार्टी को साफ बहुमत न मिले। ऐसी स्थिति में तमिलनाडु में इस बार गठबंधन सरकार बनने की संभावना भी बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी DMK के नेतृत्व वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) फिलहाल मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, क्योंकि उसने अपने ज्यादातर सहयोगी दलों को साथ बनाए रखा है। लेकिन मामला इतना आसान भी नहीं है। सरकार कई साल से सत्ता में है, इसलिए लोगों में “एंटी-इंकंबेंसी” यानी सत्ता विरोधी भावना भी देखने को मिल सकती है। विपक्ष लगातार महिलाओं की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सरकार को घेर रहा है, जिससे मुकाबला कड़ा हो सकता है।
इस पूरे चुनाव को और दिलचस्प बना रही है अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK। उनकी एंट्री से वोट कटने का खतरा बढ़ गया है। माना जा रहा है कि अगर TVK अच्छा वोट शेयर ले जाती है, तो बड़े दलों की जीत का अंतर काफी कम हो सकता है और सीधी टक्कर और भी रोमांचक बन सकती है। कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि इसका सीधा नुकसान DMK को ही उठना पड़ सकता है।
दरअसल विजय अपने पूरे चुनावी अभियान में DMK को निशाना बना रहे हैं और उनका दावा है कि तमिलनाडु में मुख्य मुकाबला उनकी पार्टी और सत्ताधारी DMK के बीच है। वे AIADMK और BJP के बारे में चुप ही नजर आते हैं।
एक खास बात ये है कि तमिलनाडु चुनाव इस बार पुराने पैटर्न से अलग नजर आ रहे हैं। अब तक राज्य की राजनीति में DMK और AIADMK के बीच सीधी टक्कर होती थी, लेकिन इस बार तस्वीर बदलती दिख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार चुनाव का फैसला दो खास वर्ग करेंगे- पहली बार वोट डालने वाले युवा (Gen Z) और महिलाएं।
यानी अब सिर्फ बड़ी पार्टियों की ताकत ही नहीं, बल्कि युवाओं की सोच और महिलाओं के मुद्दे भी चुनाव का रिजल्ट तय करेंगे। इससे मुकाबला और ज्यादा दिलचस्प और अनिश्चित हो गया है।
युवा वोट बैंक में बड़ी सेंध
फरवरी 2026 में जारी की गई फाइनल वोटर लिस्ट के हिसाब से तमिलनाडु में 18 से 19 साल की उम्र के 12.51 लाख वोटर हैं। यह Gen-Z खुद में एक बहुत बड़ा वोटर बेस है। हालात ये हैं कि स्टालिन के लिए 'द्रविड़ मॉडल' के नाम पर युवाओं को जोड़े रखना अब मुश्किल हो रहा है, क्योंकि विजय खुद को एक आधुनिक और भ्रष्टाचार-मुक्त विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं। हाल ही में हुए SIR के दौरान 7.40 लाख नए युवा वोटर के नाम भी जोड़े गए हैं।
रामू मणिवन्नन एक जाने-माने प्रोफेसर और समाज-राजनीति के जानकार हैं। वह University of Madras में राजनीति और लोक प्रशासन विभाग के पूर्व प्रमुख रह चुके हैं। वे कहते हैं- विजय का असर इस चुनाव में खासकर युवाओं के बीच ज्यादा देखने को मिल सकता है, जबकि बुजुर्ग वोटर्स पर उनका प्रभाव उतना मजबूत नहीं माना जा रहा है।
इसकी बड़ी वजह उनकी फिल्मी लोकप्रियता है, जो बदलाव चाहने वाले युवा वोटर्स को आसानी से आकर्षित करती है। लेकिन यहां एक चुनौती भी है। कई लोगों को लगता है कि TVK के पास अभी साफ विचारधारा और ठोस नीतियों की कमी है। यही वजह है कि पढ़े-लिखे युवा और महिलाएं पूरी तरह जुड़ने में हिचकिचा सकती हैं।
महिलाओं का भावनात्मक जुड़ाव
तमिलनाडु की राजनीति में महिला वोटर्स हमेशा सिर्फ योजनाओं से नहीं, बल्कि नेताओं के साथ भावनात्मक जुड़ाव से भी प्रभावित होती रही हैं। पहले ये जुड़ाव काफी हद तक जयललिता के साथ दिखता था। उनके निधन के बाद ऐसा मजबूत रिश्ता बनाने वाला नेता अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आया है।
DMK ने महिलाओं के लिए कई वेलफेयर योजनाओं पर ध्यान जरूर दिया है, लेकिन सिर्फ योजनाएं ही काफी नहीं मानी जा रही हैं। कई महिलाओं को अब भी ऐसे नेता की तलाश है, जिस पर वे व्यक्तिगत भरोसा कर सकें- जैसे एक “अपना” नेता या सहारा देने वाला चेहरा।
तमिलनाडु की फाइनल वोटर लिस्ट में एक खास बात यह है कि इसमें पुरुष मतदाताओं (2.77 करोड़) के मुकाबले महिला मतदाताओं (2.89 करोड़) की संख्या ज्यादा है।
DMK ने महिलाओं के लिए कई बड़ी योजनाओं की शुरुआत की है Kalaignar Magalir Urimai Thogai यानी महिलाओं को हर महीने ₹1000 देने वाली योजना का असर मिला-जुला दिख रहा है।
एक तरफ, इस योजना से बड़ी संख्या में महिलाओं को सीधा फायदा मिला है, जिससे DMK सरकार को समर्थन भी मिला है। लेकिन दूसरी तरफ, जो महिलाएं इस योजना के दायरे में नहीं आ पाईं, उनमें निराशा और नाराजगी देखने को मिल रही है।
शहरी और ग्रामीण इलाकों में कैसा असर?
TVK जैसे नए खिलाड़ियों का असर शहरों में ज्यादा देखने को मिल सकता है। खासकर जहां युवा और नए वोटर्स ज्यादा हैं, वहां विजय की लोकप्रियता सीधे वोट में बदलने की संभावना ज्यादा है।
वहीं गांवों और ग्रामीण इलाकों में तस्वीर अलग है। यहां आज भी जाति समीकरण और स्थानीय बड़े नेताओं की पकड़ ज्यादा मायने रखती है। इसलिए DMK और AIADMK जैसे पुराने दल अभी भी मजबूत बने हुए हैं।
लेकिन कुछ शहरी सीटों पर मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है। जैसे चेन्नई के पेरंबूर जैसे इलाकों में अगर मजबूत उम्मीदवार उतरते हैं, तो DMK और TVK के बीच सीधी टक्कर हो सकती है। ऐसे हालात में पारंपरिक पार्टियां तीसरे नंबर पर भी जा सकती हैं।
फैनबेस को वोटर में बदल पाएंगे विजय?
विजय की सबसे बड़ी ताकत उनका मजबूत फैन बेस है, जिसे उन्होंने काफी हद तक राजनीतिक नेटवर्क में बदल दिया है। खासकर शहरों और अर्ध-शहरी इलाकों में उनके फैन क्लब अब एक तरह से “ग्राउंड टीम” की तरह काम कर रहे हैं, जो किसी भी नई पार्टी के लिए बड़ी बात होती है।
लेकिन असली चुनौती यहीं से शुरू होती है। भीड़ जुटाना और वोट में बदलना- ये दोनों अलग चीजें हैं। इतिहास में कई बार देखा गया है कि फिल्मी सितारों की पार्टियां रैलियों में तो भारी भीड़ खींच लेती हैं, लेकिन वोटिंग के दिन वही सपोर्ट पूरी तरह वोट में नहीं बदल पाता।
इसलिए TVK के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या विजय की लोकप्रियता “क्राउड” से निकलकर “वोट” में बदल पाएगी, या फिर यह सिर्फ माहौल तक ही सीमित रह जाएगी?
खुद को एक नए विकल्प के तौर पेश कर रहे विजय
इस चुनाव में खुद को “सिस्टम के खिलाफ” एक नई ताकत के रूप में पेश करती दिख सकती है।
TVK का पूरा कैंपेन एंटी-एस्टैब्लिशमेंट यानी मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के खिलाफ रहने की संभावना है। पार्टी खुद को DMK और AIADMK—दोनों के विकल्प के तौर पर सामने रख रही है।
इसके तहत TVK भ्रष्टाचार, जवाबदेही और सिस्टम में बड़े बदलाव जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है। पार्टी का मैसेज खासकर उन लोगों को आकर्षित कर सकता है, जो पारंपरिक राजनीति से थोड़ा निराश हैं- जैसे युवा वोटर, गिग वर्कर्स और शहरों में काम करने वाले प्रोफेशनल्स।
साथ ही, TVK पारदर्शिता और साफ-सुथरी सरकार की बात को भी प्रमुखता से उठा रही है। यानी वह खुद को “नई सोच” और बाकी पार्टियों को “पुरानी व्यवस्था” के रूप में दिखाने की कोशिश करेगी।
सरल शब्दों में कहें तो TVK का पूरा नैरेटिव यही है- “हम अलग हैं, साफ हैं और सिस्टम बदलने आए हैं।”