बाबरी मस्जिद निर्माण पर दायर PIL को हाई कोर्ट ने किया खारिज, TMC से निष्कासित हुमायूं कबीर को मिली राहत

गुरुवार (18 दिसंबर) को यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कानूनी दम नहीं है और यह याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है

अपडेटेड Dec 18, 2025 पर 4:08 PM
Story continues below Advertisement
TMC से निष्कासित हुमायूं कबीर को मिली राहत

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक और धार्मिक मुद्दे दोनों चर्चा में हैं। इसी बीच TMC से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के नाम से मस्जिद निर्माण को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दायर किया गया था, जिसको कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि इस मामले में कोई ठोस आधार नहीं है।

गुरुवार (18 दिसंबर) को यह मामला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आया। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें कानूनी दम नहीं है और यह याचिका स्वीकार करने योग्य नहीं है।

दरअसल, याचिका में आरोप लगाया गया था कि हुमायूं कबीर ने जिला प्रशासन की अनुमति के बिना बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का निर्माण शुरू कर दिया है, जो असंवैधानिक है। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर मस्जिद निर्माण की बात कही जा रही है, वह सरकारी भूमि नहीं है, बल्कि एक ट्रस्ट की निजी जमीन है। ऐसे में वहां निर्माण को लेकर आपत्ति का कोई ठोस आधार नहीं बनता।

अदालत ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कार्यक्रम या निर्माण कार्य हो रहा है, तो कानून-व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य है। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए राज्य सरकार को भी निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी स्थिति में शांति भंग न हो।


बता दे कि 6 दिसंबर को हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के नाम से एक मस्जिद की नींव रखी। इसी घोषणा के बाद से TMC ने उनसे दूरी बना ली थी और बाद में उन्हें पार्टी से निकाल बाहर कर दिया।

इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक गलियारों में चुनावी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। मुर्शिदाबाद एक मुस्लिम बहुल इलाका है और चुनाव से पहले इस तरह के धार्मिक मुद्दे का उठना राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अदालत के फैसले के बाद हुमायूं कबीर को कानूनी राहत जरूर मिली है, लेकिन राजनीतिक विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है।

पश्चिम बंगाल में आने वाले 3-4 महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले है, इसके मद्देनज़र यह मामला साफ दिखाता है कि बंगाल में राजनीति, धर्म और कानून, तीनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।