Get App

Hilsa politics: दिल्ली में 1500 रुपये किलो तक बिकने वाली मछली बंगाल में हराने और जिताने जा रही चुनाव?

Bengal Chunav 2026: बंगाली लोग महंगाई, टूटी सड़कें, लेट होती ट्रेनें, इंडस्ट्री का पलायन, राजनीतिक यू-टर्न- यहां तक कि बेंगलुरु से लौटे रिश्तेदारों की नई-नई खाने की आदतें भी सहन कर सकते हैं। लेकिन अगर मछली और मांस की उपलब्धता पर सवाल उठने लगे, तो हालात बदल सकते हैं। तब बंगाल यह दिखाने में देर नहीं लगाएगा कि सहनशीलता की भी एक सीमा होती है

Shubham Sharmaअपडेटेड Apr 10, 2026 पर 11:55 AM
Hilsa politics:  दिल्ली में 1500 रुपये किलो तक बिकने वाली मछली बंगाल में हराने और जिताने जा रही चुनाव?
Hilsa politics: दिल्ली में 1500 रुपये किलो तक बिकने वाली मछली बंगाल में हराने और जिताने जा रही चुनाव?

चुनाव का मौसम है और बंगाल के वोटरों के सामने कई तरह के मुद्दे सामने हैं- कुछ स्थानीय, कुछ राष्ट्रीय और कुछ तो अंतरराष्ट्रीय स्तर के भी। लेकिन इस बार मामला थोड़ा अलग नजर आ रहा है। ऐसा लग रहा है कि राजनीति अब आम जनता के बुनियादी मुद्दों से कहीं और ही भटक गई है। अब वोटरों से यह सोचने को कहा जा रहा है कि अगर राज्य में सत्ता बदल गई, तो उनकी थाली में मिलने वाली मछली और मटन का क्या होगा? यानी असली मुद्दों से हटकर, अब लोगों के खाने-पीने तक को चुनावी बहस का हिस्सा बनाया जा रहा है।

इस पूरे विवाद के केंद्र में है- हिलसा मछली, जो देश की राजधानी में 1500 रुपये किलो तक बिकती है और अब उसकी कीमत उस स्तर तक पहुंच गई है कि वो राज्य में चुनाव हराने और जिताने का दम रखती है।

पश्चिम बंगाल और हिलसा मछली का संबंध

पश्चिम बंगाल और हिलसा (Ilish) का रिश्ता केवल स्वाद का नहीं, बल्कि गहरी सांस्कृतिक पहचान, अर्थव्यवस्था और कूटनीति का है। बंगाली समाज में इसे 'मछलियों की रानी' कहा जाता है। बंगाल में हिलसा को शुभ माना जाता है और यह कई रीति-रिवाजों का हिस्सा है।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें