पश्चिम बंगाल के गाईघाटा BDO ऑफिस में BJP का विरोध प्रदर्शन, चप्पल लेकर पहुंचे कार्यकर्ता

भाजपा का आरोप है कि गाइघाटा के संयुक्त बीडीओ SIR कार्य के दौरान पार्टी से जुड़े पंचायत समिति सदस्यों को परेशान कर रहे हैं। पार्टी का यह भी कहना है कि भाजपा पंचायत समिति के सदस्यों को जानबूझकर काम नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों को प्राथमिकता मिल रही है

अपडेटेड Dec 17, 2025 पर 7:40 PM
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पश्चिम बंगाल के गाईघाटा BDO ऑफिस में BJP का विरोध प्रदर्शन

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। उत्तर 24 परगना जिले के गाईघाटा में बुधवार (17 दिसंबर) को BJP के प्रतिनिधिमंडल ने बीडीओ ऑफिस के बाहर जमकर हंगामा किया। यह विरोध SIR के दौरान भाजपा के पंचायत समिति के सदस्यों को परेशान करने, सदस्यों को काम नहीं देने और विपक्ष के नेता को घर नहीं देने के कारण किया गया।

भाजपा का आरोप है कि गाइघाटा के संयुक्त बीडीओ SIR कार्य के दौरान पार्टी से जुड़े पंचायत समिति सदस्यों को परेशान कर रहे हैं। पार्टी का यह भी कहना है कि भाजपा पंचायत समिति के सदस्यों को जानबूझकर काम नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों को प्राथमिकता मिल रही है। इसके अलावा, विपक्ष के नेता को सरकारी आवास नहीं दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।

इन आरोपों को लेकर BJP ने एक प्रतिनिधिमंडल बीडीओ ऑफिस भेजा था। इस प्रतिनिधिमंडल में बंगाओन दक्षिण से भाजपा विधायक स्वपन मजूमदार भी शामिल थे। लेकिन प्रतिनिधिमंडल के पहुंचते ही बीडीओ ऑफिस के बाहर भिड़ आक्रोशित हो उठे और माहौल तनावपूर्ण हो गया।


प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, BJP कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ ने बीडीओ ऑफिस के गेट को तोड़कर अंदर घुसने की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने गेट बंद कर भीड़ को रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान कई कार्यकर्ता भाजपा के झंडे के साथ-साथ हाथों में चप्पल लिए हुए नजर आए, जिससे स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई। कुछ देर के लिए वहां अफरा-तफरी मच गई।

भाजपा नेताओं का कहना है कि यह प्रदर्शन प्रशासन के पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ था। उनका आरोप है कि SIR जैसे संवेदनशील काम में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही और विपक्षी दल के जनप्रतिनिधियों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।

वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि SIR का काम पूरी तरह चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुसार किया जा रहा है और किसी भी राजनीतिक दल के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा।

गाईघाटा की यह घटना साफ संकेत देती है कि बंगाल में चुनावी माहौल अब पूरी तरह गरमा चुका है। प्रशासनिक कार्यालयों के बाहर इस तरह के प्रदर्शन आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं। अब देखना होगा कि चुनाव आयोग और जिला प्रशासन इन विवादों को शांत करने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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