आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयानबाज़ी लगातार तेज़ होती जा रही है। इसी कड़ी में बुधवार (25 फरवरी) को सुकांता मजूमदार ने मीडिया से बातचीत में ममता सरकार पर हमला बोला। उन्होंने सीधे तौर पर रोजगार, महिलाओं की आर्थिक स्थिति और कानून-व्यवस्था को लेकर मौजूदा सरकार पर निशाना साधा।
सुकांता मजूमदार ने कहा कि बंगाल में सबसे बड़ी समस्या इंडस्ट्री और नौकरी की कमी है। उन्होंने युवा साथी योजना की तरफ इशारा करते हुए कहा, "अगर युवाओं और महिलाओं को काम नहीं मिलेगा, तो वे कब तक दूसरे राज्यों में मजदूरी करने जाएंगे या फिर 1000 रुपये के सरकारी भत्ते पर निर्भर रहेंगे?" उन्होंने साफ कहा कि लोग अब सिर्फ अलाउंस नहीं, बल्कि स्थायी रोजगार चाहते हैं।
इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि BJP के कार्यक्रमों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उनके मुताबिक, महिलाएं समझ चुकी हैं कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो 'अन्नपूर्णा भंडार' जैसी योजनाओं के ज़रिए सीधे उनके खातों में ज़्यादा पैसे ट्रांसफर किए जाएंगे। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि महिलाएं और युवा अब एक ही मांग कर रहे हैं कि काम चाहिए।
वहीं, कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए सुकांता मजूमदार ने कहा कि कागज़ों में कानून सख्त है, लेकिन ज़मीन पर उसे लागू करने की इच्छाशक्ति नहीं दिखती। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहा। वोटर लिस्ट अब तक पूरी तरह फाइनल न होना भी इसी असहयोग का नतीजा है। उन्होंने SIR का जिक्र करते हुए कहा कि अगर समय पर चुनाव नहीं हुए, तो संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है और राज्य में राष्ट्रपति शासन जैसी स्थिति भी बन सकती है।
सुकांता मजूमदार ने कोलकाता और अन्य इलाकों में कथित अवैध निर्माण को लेकर भी राज्य सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कई वार्डों में गैर-कानूनी कंस्ट्रक्शन चल रहा है और स्थानीय जनप्रतिनिधि आंख मूंदे बैठे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि आम लोगों को पुलिस से सुरक्षा नहीं मिल रही, बल्कि सत्ता से जुड़े लोगों को खुली छूट दी जा रही है। चुनाव को देखते हुए भाजपा यह दावा कर रही है कि वह युवाओं को नौकरी और महिलाओं को आर्थिक मजबूती देकर 'सोनार बंगाल' का सपना पूरा करेगी।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में रोजगार, महिला सशक्तिकरण और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे बंगाल चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं। जैसे-जैसे चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे BJP और सत्ताधारी दल के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने तय हैं।