West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में 34 साल लंबे चले वामपंथी शासन को सत्ता से बेदखल करने और लगातार तीन बार मुख्यमंत्री पद संभालने वाली ममता बनर्जी एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं। साल 2011 में पहली बार मुख्यमंत्री पद का कार्यभार संभालने वाली मामत बनर्जी की निगाहें लगातार चौथी बार सीएम पद पर बने रहने की होगी। चुनाव से पहले आए सर्वे भी उनकी पार्टी के पक्ष में नजर आ रहे हैं। वोट वाइब-सीएनएन न्यूज़18 के सर्वे के मुताबिक, 294 सीटों वाली विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस को करीब 184 से 194 सीटें मिल सकती हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर कौन से वे कारण हैं, जो तय करेंगे कि ममता बनर्जी सत्ता में बनी रहेंगी या बदलाव की आंधी चलेगी।
ममता बनर्जी की व्यक्तिगत छवि इस बार तृणमूल कांग्रेस के चुनाव अभियान का सबसे बड़ा आधार बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी लोकप्रियता ने पहले भी टीएमसी को भारतीय जनता पार्टी के साथ सीधे मुकाबले में बढ़त दिलाई है।
सामने खड़ी हैं ये चुनौतियां
चौथी जीत के साथ राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ेगा कद
अगर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी लगातार चौथी बार जीत हासिल करती हैं, तो उनकी राजनीतिक विरासत और मजबूत हो जाएगी। इससे उनकी छवि एक ऐसे नेता के रूप में और पक्की होगी, जिसने 34 साल पुराने वामपंथी शासन को खत्म किया और कल्याणकारी योजनाओं पर आधारित “बंगाल मॉडल” तैयार किया। ऐसी जीत इंडिया गठबंधन के भीतर भी उनकी स्थिति को मजबूत करेगी। इससे उन्हें भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक बड़े राष्ट्रीय विपक्षी चेहरे के रूप में उभरने का मौका मिल सकता है। इससे पहले, विपक्ष के कुछ नेताओं ने गठबंधन का नेतृत्व करने के लिए राहुल गांधी के बजाय ममता बनर्जी और एम के स्टालिन के नाम का सुझाव भी दिया था।