प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल की TMC सरकार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया और इंटरनेशनल संथाल कॉन्फ्रेंस के कार्यक्रम स्थल को अचानक बदल दिया गया। यह मामला तब और बड़ा हो गया, जब खुद भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि उन्हें उत्तर बंगाल में होने वाले 9वें इंटरनेशनल संथाली कॉन्क्लेव के लिए अनुमति देने में भी दिक्कतें आईं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके दौरे के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोई भी मंत्री या मुख्यमंत्री उन्हें रिसीव करने नहीं आया, जबकि प्रोटोकॉल के मुताबिक ऐसा होना चाहिए था।
कार्यक्रम का स्थान अचानक बदला गया
यह सम्मेलन पहले बिधाननगर में होना था। लेकिन राष्ट्रपति के मुताबिक राज्य प्रशासन ने अचानक कार्यक्रम को बदलकर बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाइपुर के एक छोटे स्थान पर कर दिया।
आयोजकों ने यह भी शिकायत की कि वहां स्टेज की व्यवस्था ठीक नहीं थी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं भी खराब थीं। राष्ट्रपति ने बाद में फांसीदेवा इलाके के बिधाननगर में जाकर लोगों को संबोधित किया। यह क्षेत्र आदिवासी आबादी के लिए जाना जाता है।
राष्ट्रपति बोलीं– शायद सोचा होगा कोई नहीं आएगा
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शायद प्रशासन को लगा होगा कि इतने दूर स्थान पर कार्यक्रम करने से लोग नहीं पहुंच पाएंगे।
उन्होंने कहा, “शायद प्रशासन ने सोचा होगा कि वहां कोई नहीं जा पाएगा और राष्ट्रपति खाली जगह पर कार्यक्रम करके लौट जाएंगी। मुझे नहीं पता उनके मन में क्या था, लेकिन मुझे बहुत दुख हुआ।”
ममता बनर्जी को बताया छोटी बहन
राष्ट्रपति ने कहा कि वह भी बंगाल की बेटी हैं। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम लेते हुए कहा, “ममता ‘दीदी’ मेरी छोटी बहन जैसी हैं। पता नहीं वह मुझसे किसी वजह से नाराज हैं या नहीं। लेकिन मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं है। वह भी खुश रहें और आप सब भी खुश रहें।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस पूरे मामले को “शर्मनाक और अभूतपूर्व” बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग लोकतंत्र और आदिवासी समुदाय के सशक्तिकरण में विश्वास रखते हैं, वे इस घटना से बेहद दुखी हैं।
पीएम मोदी ने लिखा कि राष्ट्रपति, जो खुद आदिवासी समुदाय से आती हैं, उनके दर्द और दुख ने पूरे देश को आहत किया है।
उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार ने सारी हदें पार कर दी हैं। राष्ट्रपति के साथ हुआ यह व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। संथाल संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषय को इतनी हल्के में लेना भी दुखद है।”
बीजेपी ने बताया- संवैधानिक व्यवस्था का पतन
बीजेपी नेता अमित मालवीय ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि जब कोई राज्य सरकार भारत के राष्ट्रपति के पद की गरिमा का सम्मान नहीं करती, तो यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि संवैधानिक मर्यादा के टूटने का संकेत है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह घटना दिखाती है कि पश्चिम बंगाल में शासन व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित हो चुकी है।