पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान जहां कई बूथ स्तर अधिकारियों (BLO) पर काम का दबाव बढ़ने की वजह से थकान, बीमारी और तनाव देखा गया है, वहीं बांकुड़ा की एक महिला BLO ने अपने साहस और लगन से सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बांकुड़ा जिले के ब्लॉक नंबर 2 के बांकी गांव की रहने वाली सोनाली कर जन्म से ही शारीरिक रूप से चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उनके हाथ-पैरों में उंगलियां नहीं हैं। लेकिन यह कमी कभी उनकी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बनी।
सोनाली ने सामान्य स्कूल में पढ़ाई की और एक खास तरीके से उंगलियों के बिना ही पेन पकड़कर लिखना सीखा। उन्होंने 1999 में बांकुड़ा सरदामणि महिला कॉलेज से BA किया। इसके बाद वह आईसीडीएस कार्यकर्ता के रूप में काम करने लगीं। हाल ही में जब राज्य में SIR प्रक्रिया शुरू हुई, तो सोनाली को BLO की जिम्मेदारी दी गई। यह जिम्मेदारी आम लोगों के लिए भी चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन सोनाली ने इसे बिना डर के स्वीकार कर लिया।
उन्होंने मतदाताओं से घर-घर जाकर गणना फॉर्म लिए और फिर बिना उंगलियों वाले हाथ से उन्हें जांचकर ठीक किया। इसके बाद मोबाइल पर निर्वाचन आयोग का पोर्टल खोलकर उन सभी जानकारियों को डिजिटल तरीके से अपलोड किया।
अपनी मेहनत और लगातार काम की बदौलत सोनाली ने अपने क्षेत्र में लगभग 99% SIR काम पूरा कर लिया है। अब सिर्फ 1% काम बाकी है, जिसे वह जल्द पूरा कर लेंगी।
इस दौरान राज्यभर में जहां कई BLO कार्य के दबाव के कारण परेशान हैं और कई घटनाओं में BLO को स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा, वहीं सोनाली ने साबित कर दिया कि इरादे मजबूत हों तो कोई भी कमी सफलता में बाधा नहीं बन सकती। सोनाली का कहना हैं कि, "मुझे कभी डर नहीं लगा। मैं हमेशा ऐसे ही जीती आई हूं, ऐसे ही पढ़ाई की और ऐसे ही काम करती हूं।"
उनकी इस लगन, आत्मविश्वास और समर्पण को देखकर स्थानीय लोग भी गर्व महसूस कर रहे हैं। वह अब सिर्फ एक BLO नहीं, बल्कि प्रेरणा की मिसाल बन गई हैं।
पहले चरण में बिहार में SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब चुनाव आयोग (ECI) दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया चला रहा है। इसका उद्देश्य वोटर लिस्ट को अपडेट करना, गलत नाम हटाना और नए योग्य मतदाताओं को शामिल करना है, ताकि आने वाले चुनावों में वोटर लिस्ट को अपडेट किया जा सके।