1942 A Love Story: '1942 अ लव स्टोरी' जैसी कल्ट क्लासिक फिल्म इस महीने फिर से सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। विधु विनोद चोपड़ा की डायरेक्ट की गई यह फिल्म, बेहतर क्वालिटी वाले 8K विज़ुअल और 5.1 सराउंड साउंड के साथ सिनेमाघरों में लौटेगी।

1942 A Love Story: '1942 अ लव स्टोरी' जैसी कल्ट क्लासिक फिल्म इस महीने फिर से सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है। विधु विनोद चोपड़ा की डायरेक्ट की गई यह फिल्म, बेहतर क्वालिटी वाले 8K विज़ुअल और 5.1 सराउंड साउंड के साथ सिनेमाघरों में लौटेगी।
बुधवार को NH स्टूडियोज़ ने घोषणा की कि अनिल कपूर, मनीषा कोइराला और जैकी श्रॉफ स्टारर यह फ़िल्म 21 अगस्त को सिनेमाघरों में फिर से रिलीज होगी। इस फिल्म को इटली के बोलोग्ना में मौजूद दुनिया की जानी-मानी फिल्म रेस्टोरेशन सुविधा 'L'Immagine Ritrovata' और भारत की 'प्रसाद फिल्म लैब्स' के सहयोग से रिस्टोर किया गया है।
इस मेहनत भरे रेस्टोरेशन से फ़िल्म के विज़ुअल और भी शानदार हो गए हैं, जबकि इसका ओरिजिनल सिनेमैटिक अंदाज़ भी बना हुआ है। साथ ही, इसमें डॉल्बी 5.1 सराउंड साउंड मिक्स का इस्तेमाल किया गया है। 1994 में रिलीज हुई '1942: अ लव स्टोरी' हिंदी सिनेमा की सबसे पसंदीदा रोमांटिक ड्रामा फ़िल्मों में से एक है।
यह फिल्म अपनी बेहतरीन एक्टिंग के साथ-साथ आर.डी. बर्मन के सदाबहार संगीत के लिए भी याद की जाती है। 1993 में निधन से पहले, यह महान संगीतकार का आखिरी पूरा किया गया साउंडट्रैक था। 'एक लड़की को देखा', 'कुछ न कहो', 'रिम झिम रिम झिम' और 'रूठ न जाना' जैसे गाने आज भी कई पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय हैं।
री-रिलीज़ के बारे में बात करते हुए, NH स्टूडियोज़ के डायरेक्टर श्रेयंस हीरावत ने एक प्रेस नोट में कहा, "विधु विनोद चोपड़ा की शानदार फ़िल्मों के कलेक्शन को हासिल करना NH स्टूडियोज़ के लिए एक अहम उपलब्धि है। ये ऐसी फ़िल्में हैं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को आकार दिया है और कई पीढ़ियों के दर्शकों को प्रेरित करती रही हैं।
इस असाधारण विरासत को संजोने और उसका जश्न मनाने में पार्टनर बनकर हमें गर्व है। '1942: अ लव स्टोरी' से शुरुआत करते हुए, हमारी कोशिश है कि इन सदाबहार क्लासिक फ़िल्मों को बेहतरीन क्वालिटी में बड़े पर्दे पर वापस लाया जाए, ताकि दर्शक इनका अनुभव वैसे ही कर सकें जैसा इन्हें हमेशा से देखा जाना चाहिए था।"
फिल्म के नए वर्शन के बारे में बात करते हुए फिल्ममेकर विधु विनोद चोपड़ा ने कहा, "मैं एक बहुत ज़रूरी बात कहना चाहता हूं कि पहली बार दर्शक इस फिल्म को वैसे ही देख पाएँगे, जैसा इसे देखा जाना चाहिए था। क्योंकि जब यह फिल्म रिलीज़ हुई थी, तब भारत में डॉल्बी सराउंड साउंड की सही सुविधा नहीं थी। यहां तक कि कलर ग्रेडिंग में भी कुछ कमियां थीं। यह भारत की पहली फिल्म थी जिसे डॉल्बी में बनाया गया था और हम ही डॉल्बी को भारत लाए थे। मैंने फिल्म की मिक्सिंग लंदन में करवाई थी। हम इसे वापस तो ले आए, लेकिन कोई भी सिनेमा हॉल डॉल्बी चलाने के लिए तैयार नहीं था। क्या आप सोच सकते हैं? हमने मेट्रो सिनेमा में खास तौर पर बाहर से मंगवाई गई केबल बिछाईं और सराउंड साउंड स्पीकर लगवाए।"
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