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Smriti Irani: 'मेरे सामने मेरी मां...', स्मृति ईरानी ने 7 साल की उम्र में झेला था ये दर्दनाक दर्द

Smriti Irani: टीवी की फेमस एक्ट्रेस और पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी अब 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के साथ 17 साल बाद टीवी पर लौट रही हैं। फैंस उन्हें दोबारा तुलसी के किरदार में देखने को लेकर बेहद एक्साईटेड हैं। हाल ही में मोजो स्टोरी पर करण जौहर से बातचीत में उन्होंने अपनी पर्सनल लाइफ पर खुलकर बात की

Edited By: Ankita Pandeyअपडेटेड Jul 08, 2025 पर 4:17 PM
Smriti Irani: 'मेरे सामने मेरी मां...', स्मृति ईरानी ने 7 साल की उम्र में झेला था ये दर्दनाक दर्द
स्मृति ईरानी ने अपनी मां से जुड़ी एक इमोशनल स्टोरी शेयर की

Smriti Irani: टेलीविजन एक्ट्रेस और पुर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी एक बार फिर फेमस शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी 2' के साथ छोटे पर्दें पर वापसी कर रही है। करीब 17 साल बाद इस शो की वापसी हो रही है। फैंस इस शो स्मृति ईरानी को वापस से देखने के लिए काफी एक्साईटेड है। टेलीविजन की फेमस एक्ट्रेस से केंद्रीय मंत्री बनने तक की स्मृति ईरानी की जर्नी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। हाल ही में मोजो स्टोरी पर करण जौहर के साथ बातचीत में स्मृति ईरानी ने उस ‘अग्निपथ मोमेंट’ का जिक्र किया, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी और उन्हें आज वह जो कुछ भी हैं, वहां तक पहुंचने की प्रेरणा दी थी।

जब स्मृति ईरानी से पूछा गया कि कौन सा गाना उनकी जिंदगी को सबसे अच्छे तरीके से सूट करता है, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि यह "कुछ कुछ होता है" से बदलकर अब "अग्निपथ" बन गया है। उन्होंने समझाया, "मैं शायद उन हर बच्चों की तरफ से लड़ रही हूं जिन्हें कभी बराबरी से आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला।"

स्मृति ईरानी ने क्या कहा

स्मृति ईरानी ने अपनी मां से जुड़ी एक इमोशनल स्टोरी शेयर की। स्मृति ईरानी ने कहा, 'अग्निपथ' का असली वर्जन एक ऐसे बेटे की कहानी थी जो अपनी मां की इच्छा पूरी करने की कोशिश करता है और कहीं न कहीं, मेरी कहानी भी उसी से मिलती-जुलती है।" उन्होंने कहा, "फिल्म 'अग्निपथ' में जिस तरह बेटे को लगता था कि उसकी मां के साथ अन्याय हुआ है, वैसा ही कुछ मैं भी अपनी मां के लिए महसूस करती हूं। जब मैं सिर्फ 7 साल की थी, तब मेरी मां को इस वजह से घर छोड़ना पड़ा क्योंकि वह बेटा नहीं पैदा कर सकीं। मेरे लिए मेरा 'अग्निपथ' यही था,अपनी मां को फिर से वह सम्मान और एक सुरक्षित छत देना जिसकी वो हकदार थीं।"

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