आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब सार्वजनिक मंच पर आ गई है। पार्टी द्वारा राज्यसभा में उप-नेता के पद से हटाए जाने के बाद सांसद राघव चड्ढा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पटानी की बहन खुशबू पटानी ने खुलकर राघव चड्ढा का समर्थन किया है और उन्हें एक ऐसी सलाह दी है जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है।
पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उनका अंदाज काफी आक्रामक और भावुक नजर आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद में आम जनता की आवाज उठाने के उनके अधिकार को छीनने की कोशिश की गई है। राघव ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, "खामोश हूं, हारा नहीं।"
खुशबू पटानी ने बढ़ाया समर्थन का हाथ
राघव के इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए खुशबू पटानी ने उनकी योग्यता की जमकर तारीफ की। खुशबू ने कमेंट सेक्शन में लिखा कि देश को राघव जैसे शिक्षित और सुलझे हुए नेताओं की जरूरत है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया, "राघव जी, मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले समय में आप अपनी खुद की पार्टी बनाएंगे। हम सभी आपके साथ जुड़ना चाहेंगे क्योंकि आप देश के हित में काम करना चाहते हैं।" खुशबू का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्यों गिरी राघव चड्ढा पर गाज?
आम आदमी पार्टी (AAP) के भीतर मचे इस घमासान के पीछे कई गहरे राजनीतिक कारण माने जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्यसभा सचिवालय को भेजे गए पत्र में राघव चड्ढा की जगह अशोक मित्तल को नया उप-नेता नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है। उनकी इस विदाई का सबसे बड़ा कारण पिछले कुछ समय से उनकी लंबी खामोशी और पार्टी के मुख्य कार्यक्रमों से लगातार नदारद रहना माना जा रहा है। विशेष रूप से, मार्च 2024 में जब अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी हुई थी, तब राघव चिकित्सा कारणों से विदेश में थे और संकट के उस समय में सक्रिय राजनीति से उनकी दूरी ने कई सवाल खड़े किए थे। हालांकि आम आदमी पार्टी इसे एक सामान्य 'आंतरिक पुनर्गठन' और संगठनात्मक बदलाव का नाम दे रही है, लेकिन विपक्षी दल भाजपा का सीधा आरोप है कि राघव ने मुश्किल वक्त में जानबूझकर केजरीवाल से दूरी बनाई थी, जिसका खामियाजा अब उन्हें अपना पद गंवाकर भुगतना पड़ रहा है।
राघव चड्ढा ने अपने कार्यकाल के दौरान हवाई अड्डों पर खाने-पीने की चीजों के दाम कम कराने जैसे जनहित के मुद्दों पर काफी लोकप्रियता हासिल की थी। अब पद से हटाए जाने और बाहरी समर्थन मिलने के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे पार्टी के भीतर रहकर संघर्ष करेंगे या फिर खुशबू पटानी की सलाह मानकर कोई नया राजनीतिक रास्ता चुनेंगे।