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Ranvir Shorey: "कलाकार उतना ही अच्छा, जितना उसका किरदार", स्टारडम और टाइपकास्टिंग पर रणवीर शौरी की बेबाक राय

Ranvir Shorey: अभिनेता रणवीर शौरी ने बॉलीवुड में स्टारडम और टाइपकास्टिंग पर बेबाकी से राय देते हुए कहा है कि एक कलाकार की असली पहचान उसके 'स्टारडम' से नहीं, बल्कि उसके निभाए गए 'किरदार' की गहराई और महत्व से होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाइपकास्ट होने से बचने के लिए कलाकारों को सचेत रहना चाहिए और एक ही तरह के रोल को दोहराने के बजाय उन्हें मना करने का साहस दिखाना चाहिए।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Apr 17, 2026 पर 9:17 PM
Ranvir Shorey: "कलाकार उतना ही अच्छा, जितना उसका किरदार", स्टारडम और टाइपकास्टिंग पर रणवीर शौरी की बेबाक राय

बॉलीवुड में जहां चमक-धमक और 'सुपरस्टार' बनने की अंधी दौड़ मची है, वहीं कुछ कलाकार ऐसे भी हैं जो अपनी शर्तों पर काम करना पसंद करते हैं। बेहतरीन अभिनेता रणवीर शौरी उन्हीं चुनिंदा कलाकारों में से एक हैं। हाल ही में उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के बदलते स्वरूप, स्टारडम की परिभाषा और 'टाइपकास्टिंग' के बढ़ते चलन पर बेहद निडरता से अपने विचार साझा किए हैं।

स्टारडम से बड़ा है 'पात्र' का महत्व

रणवीर शौरी का मानना है कि किसी भी कलाकार की असली पहचान उसका स्टारडम नहीं, बल्कि उसके द्वारा निभाया गया किरदार होता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी कहानी में आपके पात्र का कोई ठोस महत्व नहीं है, तो आप कितने भी बड़े कलाकार क्यों न हों, आपकी प्रतिभा बेकार है। उनके अनुसार, "एक कलाकार उतना ही अच्छा होता है, जितना गहरा उसका पात्र होता है।" यही वजह है कि वे केवल स्क्रीन पर दिखने के लिए काम नहीं करते, बल्कि उन रोल की तलाश में रहते हैं जिनमें 'रस' हो।

टाइपकास्टिंग पर 'नो कॉम्प्रोमाइज' नीति

इंडस्ट्री के एक कड़वे सच 'टाइपकास्टिंग' (एक ही तरह के रोल में बंध जाना) पर बोलते हुए रणवीर ने कहा कि यहां सफलता को भुनाने का एक ही तरीका चलता है—जो बिक रहा है, उसे बार-बार बेचो। अक्सर कलाकारों पर 'कॉमिक हीरो' या 'एक्शन स्टार' का लेबल लगा दिया जाता है। रणवीर कहते हैं कि इससे बचने के लिए कलाकार को खुद सचेत रहना पड़ता है। उनके मुताबिक, अगर आपको एक ही तरह के किरदार बार-बार ऑफर हो रहे हैं, तो टाइपकास्ट होने से बचने का एकमात्र तरीका उन्हें साफ तौर पर मना करना है।

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