बॉलीवुड की दिग्गज अभिनेत्री अरुणा ईरानी ने इंडस्ट्री में कैरेक्टर आर्टिस्ट्स की कमी पर सवाल उठाए हैं। 500 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुकीं इस वेटरन एक्ट्रेस का कहना है कि आज के दौर में सशक्त सहायक भूमिकाओं के लिए जगह ही नहीं बची। पहले जहां हर कहानी में मां, मौसी या दोस्त जैसे किरदार दिल जीत लेते थे, अब वे गायब हो चुके हैं। अरुणा ने कहा, "हमारा काम छीन लिया गया है। स्टार्स सब कुछ खुद संभाल लेते हैं।"
अरुणा ने अपने 60 साल के करियर में गोविंदा की मां से लेकर ऋषि कपूर की सास तक कई यादगार रोल निभाए। 'बॉबी', 'बेटा', 'रजा बाबू' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में उनके डायलॉग और भाव आज भी फैंस की जुबान पर हैं। लेकिन आजकल हीरोज-हीरोइन्स ही सब कुछ कर लेते हैं डांस, एक्शन, इमोशन। अरुणा ने एक इंटरव्यू में बताया, "पहले परिवारिक ड्रामा में असली जान सहायक कलाकार डालते थे। अब स्क्रिप्ट्स इतनी छोटी हो गई हैं कि हम जैसे आर्टिस्ट्स को भूल ही दिया जाता है।" यह बात उन पुराने कलाकारों के संघर्ष को उजागर करती है, जो पीछे से कहानी को मजबूत बनाते थे।
इंडस्ट्री में बदलाव साफ दिख रहा है। ओटीटी और छोटे रनटाइम की वजह से किरदार कट जाते हैं। अरुणा जैसी एक्ट्रेस, जिन्होंने नौ साल की उम्र में 'गंगा जमुना' से डेब्यू किया, आज सोचती हैं कि नई पीढ़ी को क्या मिलेगा। उन्होंने महमूद और गोविंदा के साथ की जोड़ियों को याद किया, जो हिट हुईं क्योंकि सहायक रोल मजबूत थे। "अगर हम न होंगे, तो कहानी अधूरी कैसे बनेगी?" अरुणा का सवाल गूंज रहा है।
अरुणा ईरानी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर लीड एक्ट्रेस की थी। उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ भी मुख्य भूमिका निभाई थी। लेकिन बाद में उन्हें ज्यादातर साइड रोल्स में ही देखा गया। बीटा और पेट प्यार और पाप जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। इसके बावजूद, आज वह मानती हैं कि इंडस्ट्री में कैरेक्टर आर्टिस्ट की अहमियत कम होती जा रही है।
हाल ही में वह शाहिद कपूर की फिल्म ओ रोमियो में नजर आई थीं। इस फिल्म में भी उन्होंने एक महत्वपूर्ण सहायक किरदार निभाया। लेकिन उनका कहना है कि अब ऐसे मौके बहुत कम मिलते हैं।