Lata Mangeshkar-Asha Bhosle Hospital: सुरों की विरासत अब बचाएगी जिंदगियां, लता दीदी और आशा ताई की याद में बनेगा एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल

Lata Mangeshkar-Asha Bhosle Hospital: मंगेशकर परिवार के सदस्य हृदयनाथ मंगेशकर ने अपनी बहनों लता मंगेशकर और आशा भोसले की स्मृति में एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल और एक विशेष संगीत संग्रहालय बनाने की घोषणा की है। यह अस्पताल पुणे के पास बनाया जाएगा।

अपडेटेड Apr 14, 2026 पर 11:38 AM
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भारतीय संगीत जगत की दो महान विभूतियों, लता मंगेशकर और आशा भोसले, ने अपनी आवाज से दशकों तक दुनिया के जख्मों पर मरहम लगाया है। अब उनकी यही विरासत मानवता की सेवा के लिए एक नया स्वरूप लेने जा रही है। उनके भाई और प्रसिद्ध संगीतकार हृदयनाथ मंगेशकर ने अपनी दोनों बहनों को श्रद्धांजलि देते हुए एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने की घोषणा की है। यह केवल एक मेडिकल प्रोजेक्ट नहीं है, बल्कि एक भाई का अपनी बहनों के प्रति अटूट प्रेम और समाज के प्रति मंगेशकर परिवार की जिम्मेदारी का प्रतीक है।

एक अधूरा सपना, जो अब होगा बड़ा

हृदयनाथ मंगेशकर ने एक भावुक साक्षात्कार में बताया कि इस अस्पताल की योजना मूल रूप से 'स्वर कोकिला' लता मंगेशकर के सम्मान में बनाई गई थी। इसका उद्घाटन 16 अप्रैल को होना तय था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल के उद्घाटन से पहले ही आशा भोसले का भी निधन हो गया। इस दुखद मोड़ के बाद परिवार ने निर्णय लिया कि यह अस्पताल अब दोनों बहनों की स्मृति को समर्पित होगा।


अत्याधुनिक चिकित्सा और सेवा का संगम

इस भव्य परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए हृदयनाथ जी ने कहा, "हम इसे एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हमने इसके लिए काफी बड़ी जमीन ली है, बाकी सब अब ईश्वर के हाथ में है।" इस संस्थान का नाम संभावित रूप से 'लता-आशा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' या 'लता-आशा मंगेशकर आयुर्विज्ञान संस्थान' रखा जा सकता है। यह अस्पताल न केवल आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस होगा, बल्कि यहां गरीबों और जरूरतमंदों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जो लता दीदी का हमेशा से सपना था।

संगीत और यादों का संग्रहालय

अस्पताल के साथ-साथ, मंगेशकर परिवार एक विशेष म्यूजियम बनाने की भी योजना बना रहा है। यह संग्रहालय संगीत प्रेमियों के लिए किसी तीर्थ से कम नहीं होगा। यहां आने वाले लोग न केवल दोनों बहनों के संगीत सफर को करीब से देख सकेंगे, बल्कि इंटरैक्टिव अनुभवों के माध्यम से संगीत की बारीकियां भी सीख सकेंगे। यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय संगीत के स्वर्ण युग को जीवंत रखने का एक प्रयास है।

आशा भोसले का निधन 12 अप्रैल, 2026 को 92 वर्ष की आयु में हुआ। उनके जाने से मंगेशकर परिवार और पूरे देश में शोक की लहर है। लेकिन हृदयनाथ मंगेशकर का यह संकल्प बताता है कि कलाकार शारीरिक रूप से भले ही चला जाए, उसकी सेवा की भावना अमर रहती है। पुणे के पास बनने वाला यह अस्पताल स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर साबित होगा। जहां एक ओर लता जी और आशा जी की आवाज आत्मा को सुकून देती थी, वहीं अब उनके नाम से बना यह संस्थान शरीर को निरोगी बनाने का काम करेगा। मानवता के लिए इससे बेहतर श्रद्धांजलि और कुछ नहीं हो सकती।

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