बांग्लादेश के चर्चित हिंदू गायक और राजनीतिक कार्यकर्ता प्रोलॉय चाकी की जेल कस्टडी में मौत ने देश में राजनीतिक तनाव, मानवाधिकार और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। अवामी लीग से जुड़े चाकी की रविवार रात जेल में ही मृत्यु हो गई, जिससे उनके परिवार और समर्थकों में गहरी चिंता और आक्रोश फैल गया। प्रशासन का दावा है कि उनकी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, लेकिन परिवार ने जेल में लापरवाही और समय पर मेडिकल इलाज न मिलने का आरोप लगाया है। प्रोलॉय चाकी सिर्फ एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि सांस्कृतिक और संगीत जगत में भी सक्रिय थे और वे दशकों से धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील विचारधारा को बढ़ावा दे रहे थे।
