Daldal Review: भूमि पेडनेकर और आदित्य रावल की दमदार अदाकारी ने छोड़ी गहरी छाप, सस्पेंस ने दिमाग की बत्ती गुल कर दी

Daldal Review: अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज़ हुई फिल्म ‘दलदल’ ने दर्शकों का ध्यान अपनी गंभीर कहानी और सशक्त अभिनय से खींचा है। संदीप कुलकर्णी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में भूमि पेडनेकर, आदित्य रावल और संदीप कुलकर्णी खुद भी अहम भूमिकाओं में नजर आते हैं।

अपडेटेड Jan 30, 2026 पर 8:45 PM
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अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हुई 'दलदल' वेब सीरीज क्राइम थ्रिलर के शौकीनों के लिए किसी सरप्राइज गिफ्ट से कम नहीं है। मुंबई की सड़कों पर एक के बाद एक खौफनाक कत्ल हो रहे हैं, जहां हत्यारा शवों के मुंह में नॉन-वेज ठूंसकर चला जाता है। नई डीसीपी रीता फेरिरा (भूमि पेडनेकर) को यह केस सौंपा जाता है, लेकिन उनका खुद का पुराना ट्रॉमा और डिपार्टमेंट की राजनीति उन्हें हर कदम पर ललकारती है।

कहानी सात एपिसोड्स में बुनी गई है, हर एपिसोड 30-35 मिनट का, जो आपको स्क्रीन से चिपका देगा। आम मर्डर मिस्ट्री से अलग, यहां 'कौन कातिल है' से ज्यादा 'क्यों' पर फोकस है। शुरुआत से ही ट्विस्ट आते रहते हैं – दूसरे एपिसोड में वो खुलासा हो जाता है, जो ज्यादातर सीरीज के फिनाले तक खींचा जाता है। बीच में स्क्रीनप्ले थोड़ा लड़खड़ाता है, लेकिन परफॉर्मेंस और सस्पेंस इसे संभाल लेते हैं। निर्देशक अमृत राज गुप्ता ने मुंबई को बारिश से सराबोर दलदल बना दिया, जो रीता के मानसिक संघर्ष को आईना दिखाता है।

भूमि पेडनेकर का किरदार देखकर लगता है, वो अपनी पुरानी फॉर्म में लौट आई हैं। कोई हीरो वाली चाल-ढाल नहीं, बल्कि थकी हुई, आहत पुलिसवाली, जो पर्सनल दर्द से जूझ रही है। उन्होंने इंटेंस भावनाओं को इतनी बारीकी से निभाया कि दर्शक रीता के दर्द में डूब जाते हैं। समारा तिजोरी (दीपक तिजोरी की बेटी) ने डेब्यू में कमाल कर दिया उनकी परफॉर्मेंस इतनी नेचुरल और पावरफुल है कि नेपोटिज्म को सही ठहरा देती है। आदित्य रावल (परेश रावल के बेटे) ने संदिग्ध ड्रग एडिक्ट का रोल इतने गहराई से खेला कि ट्रेजिक बैकग्राउंड झलक पड़ता है। संदीप कुलकर्णी और बाकी कास्ट ने भी जान फूंकी है।

राइटिंग में पांच लोगों का हाथ है, जो कई बार भटकाव लाता है, लेकिन डायरेक्शन टाइट रखता है। यह सीरीज जेंडर क्राइम, ट्रैफिकिंग और टॉक्सिक रिलेशनशिप जैसे मुद्दों को छूती है, बिना प्रीची न बनाए। ‘दलदल’ सिर्फ एक मनोरंजन फिल्म नहीं है, बल्कि यह समाज की सच्चाई और इंसानी संघर्षों को सामने लाती है। फिल्म में रिश्तों की जटिलता, सामाजिक दबाव और इंसान की कमजोरियों को बारीकी से दिखाया गया है। यही वजह है कि दर्शक इसे देखते समय खुद को कहानी से जोड़ पाते हैं।


फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर भी इसके प्रभाव को बढ़ाते हैं। हर फ्रेम में एक गहराई है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। यह फिल्म उन लोगों के लिए खास है जो सिर्फ़ मनोरंजन नहीं बल्कि गंभीर और सोचने पर मजबूर करने वाली कहानियों को पसंद करते हैं। सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। दर्शक भूमि और आदित्य के अभिनय की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि ‘दलदल’ एक ऐसी फिल्म है जो लंबे समय तक याद रहेगी और समाज पर गहरी छाप छोड़ेगी।

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