मणिपुरी फिल्म बूंग ने 79वें BAFTA अवॉर्ड्स में ‘बेस्ट चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म’ का प्रतिष्ठित सम्मान जीतकर भारतीय सिनेमा के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। यह पहली बार है जब किसी भारतीय फिल्म को इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर यह बड़ा खिताब मिला है, जिसने देश को गौरवान्वित कर दिया है। इस जीत ने न केवल भारतीय फिल्मों की वैश्विक पहुंच को मजबूत किया है, बल्कि मणिपुरी सिनेमा को भी नई पहचान और सम्मान दिलाया है।
लंबे समय से क्षेत्रीय सिनेमा अपनी अलग कहानियों और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता रहा है, और अब इस उपलब्धि ने उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। यह सफलता आने वाले समय में भारतीय क्षेत्रीय फिल्मों के लिए प्रेरणा का काम करेगी।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजा भारतीय सिनेमा का नाम
डायरेक्टर लक्ष्मीप्रिया देवी के निर्देशन में बनी इस फिल्म को फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी ने अपने प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट के तहत प्रोड्यूस किया है। BAFTA अवॉर्ड समारोह में भारतीय प्रोड्यूसर एलन मैकएलेक्स ने इस प्रतिष्ठित सम्मान को स्टेज पर जाकर रिसीव किया। इस खास मौके पर फरहान और रितेश की मौजूदगी ने इस जीत को और भी गौरवपूर्ण बना दिया।
ओटीटी पर उपलब्ध नहीं, देखने के लिए करना होगा इंतजार
हालांकि ‘बूंग’ ने दुनियाभर में सराहना बटोरी है, लेकिन भारतीय दर्शकों के लिए इसे देख पाना अभी आसान नहीं है। यह फिल्म फिलहाल नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम वीडियो या जियो हॉटस्टार जैसे किसी भी बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नहीं है। शुरुआत में इसे MUBI ऐप पर रिलीज किया गया था, लेकिन अब वहां भी यह स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध नहीं है।
फिल्म फेस्टिवल्स में भी मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स
‘बूंग’ का वर्ल्ड प्रीमियर 2024 के टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ, जहां इसे शानदार प्रतिक्रिया मिली। इसके बाद मुंबई फिल्म फेस्टिवल, वारसॉ इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न जैसे प्रतिष्ठित मंचों पर भी इसे खूब सराहा गया। सितंबर 2025 में थिएटर रिलीज के बाद फिल्म को वर्ड ऑफ माउथ का भरपूर फायदा मिला।
सामाजिक सच्चाई और भावनाओं से जुड़ी दमदार कहानी
फिल्म की कहानी मणिपुर के एक छोटे गांव में रहने वाले मासूम बच्चे ‘बूंग’ के इर्द-गिर्द घूमती है। बूंग अपनी मां को खुश करने के लिए अपने खोए हुए पिता को ढूंढने का सपना देखता है। इस सफर में उसका दोस्त राजू उसका साथ देता है। लेकिन इस मासूम यात्रा में उसे जिंदगी की कड़वी सच्चाइयों का सामना करना पड़ता है। फिल्म भावनाओं, उम्मीद और संघर्ष का खूबसूरत मिश्रण है।
‘सपनों की जीत’ बनी बूंग की सफलता
‘बूंग’ की जीत को फरहान अख्तर ने सपने देखने वालों की जीत बताया, जबकि फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गजों ने भी टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। यह फिल्म सिर्फ एक अवॉर्ड जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा की ताकत और संभावनाओं को पूरी दुनिया के सामने मजबूती से पेश किया है।