बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन डांसर और अभिनेत्री मानी जाने वाली माधुरी दीक्षित के नाम कई ऐसे गाने दर्ज हैं जो आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस 'एक दो तीन' गाने ने माधुरी को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया था, उसकी शूटिंग के दौरान उन्होंने कितनी शारीरिक पीड़ा सही थी? हाल ही में इस गाने से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है, जो बताता है कि उस समय माधुरी के पैरों से खून निकलने तक की नौबत आ गई थी।
38 साल पुराना वो ऐतिहासिक सफर
साल 1988 में आई फिल्म 'तेजाब' का गाना 'एक दो तीन' आज भी उतना ही लोकप्रिय है जितना उस समय था। अलका याग्निक की आवाज और सरोज खान की कोरियोग्राफी ने इस गाने को अमर बना दिया। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान माधुरी दीक्षित ने बताया कि इस गाने की शूटिंग के आखिरी पड़ाव में उन पर और पूरी टीम पर कितना दबाव था।
माधुरी ने साझा किया कि शूटिंग के आखिरी दिन सेट को खाली करने और तोड़ने का दबाव था, जिसके कारण पूरी टीम ने लगातार 24 घंटे तक काम किया। उन्होंने बताया कि लगातार डांस स्टेप्स और पैरों के मूवमेंट की वजह से उनके पैरों की हालत बेहद खराब हो गई थी। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि उनके पैरों से खून निकलने वाला था।
जब माधुरी थककर चूर हो गईं, तो उन्होंने निर्देशक एन. चंद्रा से ब्रेक की गुजारिश की। उन्होंने कहा, "मैं बहुत थक गई हूं, अब और नहीं हो पाएगा।" लेकिन काम पूरा करने के जुनून में निर्देशक ने बीच का रास्ता निकालते हुए क्लोज-अप शॉट्स की जगह लॉन्ग शॉट्स लेना शुरू कर दिया, ताकि शूटिंग रुकने न पाए।
लाइव ऑडियंस और सड़क से आए लोग
इस गाने की एक और दिलचस्प बात यह रही कि इसमें दिख रही भीड़ कोई साधारण जूनियर आर्टिस्ट्स की भीड़ नहीं थी। एन. चंद्रा स्टूडियो को पूरी तरह से भरा हुआ दिखाना चाहते थे। पहले कुछ लाइनों में तो कलाकार थे, लेकिन बाकी स्टूडियो भरने के लिए उन्होंने सड़क से गुजर रहे आम लोगों को अंदर बुला लिया और कहा, "फिल्म में काम करना है? अंदर आ जाओ।"
शूटिंग के दौरान उत्साह इतना था कि एक व्यक्ति ने जोश में आकर अपनी शर्ट उतारकर हवा में लहरा दी। निर्देशक को यह नेचुरल अंदाज़ इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे गाने का हिस्सा बना लिया।
लगभग चार दशक बीत जाने के बाद भी इस गाने का क्रेज कम नहीं हुआ है। माधुरी के वो सिग्नेचर स्टेप्स आज भी डांस प्रेमियों के लिए एक बेंचमार्क हैं। यह कहानी इस बात का सबूत है कि परदे पर जो चमक हमें दिखती है, उसके पीछे कलाकारों का बेहिसाब पसीना, थकान और कभी-कभी खून भी शामिल होता है।