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Cinema Ka Flashback: जब धर्मेंद्र के खलनायक अवतार ने हिला दिया था राजेंद्र कुमार का सिंहासन, 62 साल पहले आई फिल्म ने रचा था इतिहास

Cinema Ka Flashback: साल 1964 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'आई मिलन की बेला' में धर्मेंद्र ने अपने करियर का बड़ा जोखिम उठाते हुए पहली बार नेगेटिव रोल निभाया था। उनके दमदार अभिनय का जादू ऐसा चला कि वे फिल्म के मुख्य नायक राजेंद्र कुमार पर भी भारी पड़ गए और इसी सफलता ने धर्मेंद्र के लिए आगे चलकर लीड हीरो के तौर पर ढेरों फिल्मों के रास्ते खोल दिए।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Mar 25, 2026 पर 4:35 PM
Cinema Ka Flashback: जब धर्मेंद्र के खलनायक अवतार ने हिला दिया था राजेंद्र कुमार का सिंहासन, 62 साल पहले आई फिल्म ने रचा था इतिहास

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसी फिल्में और किरदार होते हैं जो समय के साथ और भी ज्यादा निखरते जाते हैं। ऐसी ही एक फिल्म थी साल 1964 में आई 'आई मिलन की बेला'। इस फिल्म को आज भी इसलिए याद किया जाता है क्योंकि इसमें 'ही-मैन' धर्मेंद्र ने अपने करियर का सबसे बड़ा रिस्क लिया था एक ऐसे समय में जब वे अपनी पहचान बना रहे थे, उन्होंने पर्दे पर विलेन (खलनायक) की भूमिका निभाने का फैसला किया।

हीरो की चमक पर भारी पड़ा 'विलेन' का अंदाज

आमतौर पर कोई भी उभरता हुआ अभिनेता नेगेटिव रोल करने से बचता है, लेकिन धर्मेंद्र ने अपनी प्रतिभा पर भरोसा किया। फिल्म में लीड रोल में उस दौर के 'जुबली स्टार' राजेंद्र कुमार और खूबसूरत अभिनेत्री सायरा बानो थे। लेकिन जब फिल्म रिलीज हुई, तो सारा ध्यान धर्मेंद्र ने अपनी ओर खींच लिया। उनके अभिनय की गहराई और स्क्रीन प्रेजेंस इतनी जबरदस्त थी कि कई दृश्यों में वे फिल्म के मुख्य नायक राजेंद्र कुमार पर भी भारी पड़ते नजर आए।

एक साहसी फैसला और बदल गई किस्मत

1960 में 'दिल भी तेरा हम भी तेरे' से डेब्यू करने वाले धर्मेंद्र के लिए आई मिलन की बेला एक मील का पत्थर साबित हुई। विलेन बनने का उनका यह दांव उनके हक में गया और इस फिल्म के बाद उनके पास मुख्य नायक के तौर पर फिल्मों की कतार लग गई। समीक्षकों का मानना है कि इस फिल्म ने साबित कर दिया था कि धर्मेंद्र केवल एक गुड-लुकिंग चेहरा नहीं, बल्कि एक मंझे हुए कलाकार हैं जो किसी भी जटिल किरदार को जीवंत कर सकते हैं।

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