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Imtiaz Ali: 'सिनेमा एक लोकतंत्र है, दर्शक ही असली मालिक', फिल्मों में गाली-गलौज और भाषा पर इम्तियाज अली की बेबाक राय

Imtiaz Ali: मशहूर निर्देशक इम्तियाज अली ने फिल्मों में गाली-गलौज और कड़वी भाषा के इस्तेमाल पर उदार रुख अपनाते हुए कहा कि दर्शक ही सिनेमा के असली मालिक हैं और उन्हें तय करने देना चाहिए कि वे क्या देखना चाहते हैं। उनका मानना है कि 'सर्वाइवल ऑफ द फिटेस्ट' के सिद्धांत की तरह, जो संवाद दर्शकों को पसंद नहीं आएंगे, वे स्वाभाविक रूप से खुद-ब-खुद फिल्मों से गायब हो जाएंगे।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Apr 19, 2026 पर 5:49 PM
Imtiaz Ali: 'सिनेमा एक लोकतंत्र है, दर्शक ही असली मालिक', फिल्मों में गाली-गलौज और भाषा पर इम्तियाज अली की बेबाक राय

हिंदी सिनेमा में अपनी संजीदा और रूहानी फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक इम्तियाज अली एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार वह अपनी किसी प्रेम कहानी के कारण नहीं, बल्कि सिनेमा की बदलती भाषा और उसमें इस्तेमाल होने वाले अपशब्दों पर दिए गए अपने उदारवादी विचारों को लेकर सुर्खियों में हैं। अपनी आने वाली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के प्रचार के दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि वह सिनेमा को एक लोकतांत्रिक माध्यम मानते हैं, जहां अंतिम फैसला जनता का होना चाहिए।

लोकतंत्र में सेंसरशिप नहीं, दर्शकों की पसंद सर्वोपरि

इम्तियाज अली का मानना है कि हम एक लोकतांत्रिक देश में रहते हैं और यहां हर कहानीकार को अपनी बात कहने की आजादी होनी चाहिए। फिल्मों में बढ़ती गाली-गलौज या 'वल्गर' भाषा के सवाल पर उन्होंने बहुत ही तार्किक रुख अपनाया। उन्होंने कहा, "मैं एक दर्शक के तौर पर जजमेंटल नहीं हूं। मेरा मानना है कि अगर हम लोकतंत्र में रहते हैं, तो हमें लोगों को यह तय करने देना चाहिए कि वे क्या देखना चाहते हैं।"

उनके अनुसार, सिनेमा एक बहुत ही लोकतांत्रिक माध्यम है। जब कोई व्यक्ति अपनी मेहनत की कमाई से टिकट खरीदता है, तो उसे यह चुनने का पूरा अधिकार है कि वह किस तरह की सामग्री देखना चाहता है। इम्तियाज ने जोर देकर कहा कि किसी के पास यह कहने का अधिकार नहीं है कि दर्शकों के लिए क्या अच्छा है और क्या बुरा।

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