हिंदी सिनेमा में अपनी संजीदा और रूहानी फिल्मों के लिए मशहूर निर्देशक इम्तियाज अली एक बार फिर चर्चा में हैं। लेकिन इस बार वह अपनी किसी प्रेम कहानी के कारण नहीं, बल्कि सिनेमा की बदलती भाषा और उसमें इस्तेमाल होने वाले अपशब्दों पर दिए गए अपने उदारवादी विचारों को लेकर सुर्खियों में हैं। अपनी आने वाली फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के प्रचार के दौरान उन्होंने साफ कर दिया कि वह सिनेमा को एक लोकतांत्रिक माध्यम मानते हैं, जहां अंतिम फैसला जनता का होना चाहिए।
