Cinema Ka Flashback: कभी अंडे बेचे तो कभी चलाई टैक्सी, संघर्षों से तपकर 'कॉमेडी किंग' बने महमूद, जो सुपरस्टार्स से भी ज्यादा लेते थे फीस

Cinema Ka Flashback: मशहूर कॉमेडियन महमूद अली के फर्श से अर्श तक का सफर काफी रोमांचक है, उन्होंने गरीबी के दिनों में सड़क पर अंडे बेचने और टैक्सी चलाने जैसे काम किए। अपनी मेहनत के दम पर वे फिल्म इंडस्ट्री के इतने बड़े सितारे बने कि उनका पारिश्रमिक उस दौर के मुख्य अभिनेताओं से भी कहीं अधिक होता था।

अपडेटेड Apr 09, 2026 पर 4:16 PM
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आज के दौर में जब हम सबसे अमीर और महंगे एक्टर्स की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में शाहरुख खान, सलमान खान या रजनीकांत जैसे नाम आते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा दौर भी था, जब पर्दे पर हीरो से ज्यादा जलवा एक कॉमेडियन का होता था? हम बात कर रहे हैं बॉलीवुड के 'कॉमेडी किंग' महमूद अली की, जिनकी शख्सियत और हुनर का आलम यह था कि वे अपनी एक फिल्म के लिए उस दौर के लीडिंग हीरोज से भी ज्यादा फीस वसूलते थे।

सड़क से सितारों तक का सफर

महमूद का जन्म बॉम्बे टॉकीज के डांसर और एक्टर मुमताज अली के घर हुआ था, लेकिन उनके लिए सफलता की राह फूलों की सेज नहीं थी। एक समय ऐसा भी था जब उनके पिता की शराब की लत के कारण परिवार गहरे आर्थिक संकट में डूब गया था।

घर का गुजारा चलाने के लिए महमूद ने छोटी उम्र में ही जी-तोड़ मेहनत की। उन्होंने:


* सड़कों पर अंडे बेचे।

* ड्राइवर की नौकरी की।

* घुड़सवारी के प्रशिक्षक बने।

* टेनिस कोच के रूप में भी काम किया।

जब कॉमेडियन की फीस ने हीरोज को पीछे छोड़ा

महमूद ने अपने करियर की शुरुआत एक जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर की थी, लेकिन 1960 के दशक तक आते-आते वे फिल्म इंडस्ट्री के सबसे धनी और प्रभावशाली सितारों में शुमार हो गए। उन्होंने अपने पूरे करियर में लगभग 300 फिल्मों में अभिनय किया।

उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई बार फिल्म के पोस्टर्स पर उनकी तस्वीर मुख्य अभिनेता से बड़ी होती थी। खबरों की मानें तो, उन्होंने एक बार दो हफ्ते के कैमियो रोल के लिए 7.5 लाख रुपये चार्ज किए थे, जो उस समय एक बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी। 'पड़ोसन', 'भूत बंगला' और 'बॉम्बे टू गोवा' जैसी फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया।

बहुमुखी प्रतिभा के धनी

महमूद सिर्फ एक बेहतरीन कॉमेडियन ही नहीं थे, बल्कि वे एक कुशल निर्देशक और सिंगर भी थे। उन्होंने कई कलाकारों के करियर को संवारा, जिनमें मेगास्टार अमिताभ बच्चन का नाम भी शामिल है। महमूद के बेटे लकी अली आज एक मशहूर सिंगर हैं, जो अपनी पिता की विरासत को संगीत के जरिए आगे बढ़ा रहे हैं।

आखिरी सफर

2004 में दुनिया को अलविदा कहने वाले महमूद की आखिरी फिल्म 'गार बाजार' थी, हालांकि उनकी निर्देशित आखिरी फिल्म 'दुश्मन दुनिया का' (1996) रही। आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कॉमेडी टाइमिंग और संघर्ष की यह दास्तां आज भी नए कलाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है।

महमूद अली की कहानी हमें सिखाती है कि यदि आपके पास हुनर और मेहनत करने का जज्बा है, तो सड़क से शिखर तक का सफर तय करना नामुमकिन नहीं है। वे बॉलीवुड के वह सितारे थे जिन्होंने साबित किया कि हंसाना दुनिया का सबसे मुश्किल काम है और उन्होंने इसे बखूबी निभाया।

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