मूवी रिव्यू- ‘हैप्पी पटेल’

मूवी रिव्यू- ‘हैप्पी पटेल’
रेटिंग: 2.5/5
कलाकार- वीर दास, मिथिला पार्कर, मोना सिंह, आमिर खान, इमरान खान
निर्देशक- वीर दास और कवि शास्त्री
आमिर खान के प्रोडक्शन में बनी 'हैप्पी पटेल: खतरनाक जासूस' सिनेमाघरों में धमाल मचाने आई है। वीर दास की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म स्पाई थ्रिलर और देसी कॉमेडी का मिक्स है, जो जेम्स बॉन्ड स्टाइल को भारतीय मसाले के साथ परोसती है। क्या यह हंसी के फव्वारे छोड़ती है या स्क्रिप्ट की भूलों में उलझ जाती है? आइए डिटेल में इस फिल्म का रिव्यू जानते हैं ।
गोवा में जासूसी का तमाशा
फिल्म 1991 से शुरू होती है जब डॉन जिमी मारियो (आमिर खान कैमियो) और ब्रिटिश जासूसों के बीच गोवा में खूनी जंग छिड़ती है। जासूसों की नौकरानी की मौत हो जाती है, जिसका बेटा हैप्पी (वीर दास) वे पालते हैं। बड़ा होकर हैप्पी जासूस बनने का सपना देखता है, लेकिन MI7 एजेंसी के एग्जाम में 7 बार फेल फिर नाटकीय ट्विस्ट में उसे गोवा भेजा जाता है।
गोवा पहुंचते ही हैप्पी की मुलाकात लोकल हेल्पर गीत (शारिब हाशमी), जूनियर रॉक्सी (सृष्टि तावड़े), डांसर रूपा (मिथिला पालकर) और खूंखार मामा (मोना सिंह) से होती है। कहानी बेवकूफी भरी गलतफहमियों, टूटी-फूटी हिंदी, डबल मीनिंग जोक्स और बॉलीवुड गानों पर चलती है। हैप्पी अपनी खाना बनाने की स्किल और देसी दिमाग से मिशन पूरा करता है, साथ में भारत की मिट्टी से जुड़ाव का एहसास पाता है। 2 घंटे 1 मिनट की यह फिल्म दिमाग पर जोर नहीं देने को कहती है।
एक्टिंग का कमाल
वीर दास हैप्पी के रोल में जान डाल देते हैं। उनका चार्म, ह्यूमर और हीरोइज्म का कॉम्बो स्क्रिप्ट की कमजोरियों को ढक लेता है। शारिब हाशमी का गीत फिल्म की रीढ़ है, जो साइडस्प्लिटिंग मोमेंट्स देता है। मिथिला पालकर की रूपा क्यूट और मसालेदार है, जबकि मोना सिंह की मामा खतरनाक और हास्यपूर्ण। आमिर खान और इमरान खान के कैमियो सरप्राइज पैकेज हैं, जो पहले हाफ को बूस्ट देते हैं। लेकिन स्क्रिप्ट सभी को फुल जस्टिफाई नहीं कर पाती। [
क्या फिसल गई फिल्म?
पहला हाफ तेज रफ्तार और चुटीले डायलॉग्स से मजेदार है, लेकिन दूसरा हाफ लटक जाता है। स्टैंड-अप कॉमेडी स्टाइल के गैग्स थकाने लगते हैं। जासूस मिशन, एनआरआई कल्चर, गोरा कॉम्प्लेक्स और SRK वाले रोमांस का मजाक अच्छा है, लेकिन कनेक्शन कमजोर है। हंसते-हंसते थकान हो जाती है। म्यूजिक एवरेज, लोकेशन्स गोवा की खूबसूरती दिखाती हैं।
क्यों देखें फिल्म
दर्शक पहला हाफ पसंद कर रहे हैं, लेकिन ओवरऑल मिक्स्ड रिव्यूज आ रहे हैं। फैमिली और कॉमेडी लवर्स के लिए वीकेंड फन, लेकिन सस्टेंडेड लाफ्टर की उम्मीद न करें। वीर दास का कोरिज बॉक्स ऑफिस टेस्ट करेगी।
फिल्म का संगीत हल्का और कहानी के साथ मेल खाता है। बैकग्राउंड स्कोर कॉमेडी सीन्स को और मजेदार बनाता है। सिनेमैटोग्राफी में गोवा और मुंबई की लोकेशंस को खूबसूरती से दिखाया गया है, जो फिल्म को विजुअल ट्रीट बनाते हैं। ‘हैप्पी पटेल’ सिर्फ हंसी-ठहाकों तक सीमित नहीं है। यह फिल्म दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जिंदगी में खुश रहना कितना जरूरी है, चाहे हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों। फिल्म का संदेश है कि छोटी-छोटी खुशियों को जीना ही असली सफलता है।
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