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Satluj Controversy: कौन हैं जसवंत सिंह खालरा? भारत में 'सतलुज' को किया गया बैन, जानें अब तक फिल्म मामले में क्या-क्या हुआ

Satluj Controversy: हनी त्रेहान की पॉलिटिकल थ्रिलर 'सतलुज' को सेंसर के साथ चार साल तक जूझना पड़ा और दो बार इसका नाम बदलना पड़ा। लेकिन आखिर में इसे दर्शकों ने सिर्फ दो दिन ही देखा। फिल्म से जुड़ा ये पूरा क्या मामला है चलिए आपको बताते हैं।

Manushri Bajpaiअपडेटेड Jul 06, 2026 पर 1:59 PM
Satluj Controversy: कौन हैं जसवंत सिंह खालरा? भारत में 'सतलुज' को किया गया बैन, जानें अब तक फिल्म मामले में क्या-क्या हुआ
'सतलुज' फिल्म का मुख्य विषय पंजाब पुलिस पर खालरा के वे आरोप हैं, जिनमें कहा गया था कि पुलिसकर्मियों ने हजारों लोगों की गैर-न्यायिक हत्याएं कीं।

Satluj Controversy: इस शुक्रवार को Zee5 पर आने के बाद, हनी त्रेहान की काफी चर्चा में रही है। उनकी फिल्म 'सतलुज' को रविवार को बिना किसी इंफॉर्मेशन के प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा की भूमिका निभाई है।

फिल्म को बनने में चार साल से ज्यादा का समय लगा, जिसमें सेंसर बोर्ड के साथ तीन साल तक लड़ाई की और फिल्म के नाम में दो बार बदलाव शामिल हैं। अब, देर सवेर से रिलीज होने के कुछ ही दिनों बाद, यह फिल्म फिर से दर्शकों तक पहुंचने के लिए संघर्ष कर रही है। लेकिन यह किस बारे में है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों है? आइए जानते हैं...

'पंजाब 95' नाम क्यों दिया गया था?

'सतलुज' एक बायोपिक ड्रामा है, जिसका नाम पहले 'पंजाब 95' था। यह फिल्म जसवंत सिंह खालरा की जिदगी से लेकर मौत तक की कहानी बताती है। खालरा एक बैंक क्लर्क थे, जो 90 के दशक के बीच पंजाब में मानवाधिकारों के लिए लड़ने वाले एक बड़े कार्यकर्ता बन गए थे। उन्होंने 1984 से 1994 के बीच राज्य में 25,000 लोगों के अंतिम संस्कार की जांच की थी। इस फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालरा का किरदार निभाया है और उनके साथ गीतिका विद्या ओहलन, अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और कंवलजीत सिंह भी हैं। यह फिल्म सच्ची घटनाओं पर आधारित है और इसमें कुछ असली किरदारों को काल्पनिक रूप दिया गया है। इसके जरिए 80 और 90 के दशक में पंजाब में उग्रवाद के खिलाफ पंजाब पुलिस की लड़ाई का काला चेहरा दिखाया गया है।

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