फिल्म- दुल्हनिया ले आएगी

फिल्म- दुल्हनिया ले आएगी
स्टार कास्ट- महेश मांजरेकर, पीयूष मिश्रा, खुशाली कुमार, ओमकार कपूर, स्नेहिल दीक्षित मेहरा (बीसी आंटी)
निर्देशक- आकाशादित्य लामा
रेटिंग- 3.5/5
Dulhaniya Le Aaeegi Review: बॉलीवुड में रोमांटिक कॉमेडी का दौर कभी खत्म नहीं होता। हां बस उसको पेश करने का तरीका जरूर बदलता रहता है। 'दुल्हनिया ले आएगी' भी उसी तरह की एक फिल्म है, जो रिश्तों, परिवार और प्यार को हल्के-फुल्के अंदाज में पेश करती है। यह ऐसी फिल्म नहीं है जो आपको चौंकाने की कोशिश करे, बल्कि ऐसी फिल्म है जो आपको मुस्कुराने, किरदारों से जुड़ने और आखिर तक उनके साथ बने रहने की वजह देती है।
फिल्म की कहानी नव्या (खुशाली कुमार) की है, जिसकी शादी उसकी उम्र बढ़ने के साथ परिवार के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। लेकिन जब उसकी जिंदगी में शादी का मौका आता है, तो मामला उलझ जाता है। एक के बाद एक कई दूल्हों की एंट्री होती है और कहानी कॉमेडी, कन्फ्यूजन और सस्पेंस का दिलचस्प मिश्रण बन जाती है। आखिर नव्या का दूल्हा कौन होगा, यही सवाल फिल्म को अंत तक रोचक बनाए रखता है।
कहानी का ढांचा भले ही पारंपरिक हो, लेकिन इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अपने किरदारों पर भरोसा करती है। पटकथा कहीं भी जल्दबाजी नहीं करती। रिश्तों को समय दिया गया है और यही वजह है कि कई भावनात्मक दृश्य प्रभाव छोड़ते हैं। हालांकि कुछ मोड़ पहले से अनुमान लगाए जा सकते हैं, लेकिन फिल्म की प्रस्तुति उन्हें मनोरंजक बनाए रखती है।
इस पूरी कहानी का सबसे चमकदार पक्ष हैं खुशाली कुमार। उन्होंने नव्या के किरदार में जिस आत्मविश्वास और सहजता के साथ जान डाली है, वह फिल्म को एक अलग स्तर पर ले जाती है। उनके चेहरे के भाव, संवाद अदायगी और स्क्रीन प्रेजेंस लगातार प्रभावित करते हैं। खास बात यह है कि वह किसी भी दृश्य में ओवरएक्टिंग का सहारा नहीं लेतीं। उनका अभिनय नियंत्रित है, लेकिन असरदार है। कॉमिक सीन्स में उनकी टाइमिंग अच्छी है, रोमांटिक दृश्यों में वह सहज लगती हैं और इमोशनल सीक्वेंस में वह दर्शकों से जुड़ने में कामयाब रहती हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि अगर खुशाली का अभिनय इतना मजबूत न होता, तो फिल्म का असर भी इतना गहरा नहीं होता।
महेश मांजरेकर हमेशा की तरह अपने अनुभव का पूरा फायदा उठाते हैं। कम संवादों में भी उनका प्रभाव साफ महसूस होता है। पीयूष मिश्रा अपने अलग अंदाज से हर दृश्य में विश्वसनीयता जोड़ते हैं और उनका अभिनय कहानी को मजबूती देता है। ओमकार कपूर अपने किरदार में फिट बैठते हैं और स्क्रीन पर अच्छी ऊर्जा लेकर आते हैं। वहीं स्नेहिल दीक्षित मेहरा अपनी मौजूदगी दर्ज कराने में सफल रहती हैं। सभी सहायक कलाकार मिलकर फिल्म के पारिवारिक माहौल को जीवंत बनाते हैं।
निर्देशन की बात करें तो फिल्म अपनी शैली से भटकती नहीं है। निर्देशक जानते हैं कि वह किस तरह की फिल्म बना रहे हैं और उसी टोन को आखिर तक बनाए रखते हैं। सिनेमैटोग्राफी रंगीन और आकर्षक है। शादी और पारिवारिक आयोजनों को खूबसूरती से फिल्माया गया है। कॉस्ट्यूम्स और प्रोडक्शन डिजाइन भी फिल्म के माहौल को विश्वसनीय बनाते हैं। संगीत कहानी का साथ देता है और बैकग्राउंड स्कोर कई दृश्यों के भावनात्मक असर को बढ़ाता है।
कमियों की बात करें तो दूसरे हाफ में कहानी थोड़ी दोहराव वाली लगने लगती है। कुछ किरदारों को और विस्तार मिल सकता था और क्लाइमैक्स तक पहुंचने का सफर थोड़ा और कसाव मांगता है। लेकिन ये कमियां फिल्म के मनोरंजन मूल्य को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं करतीं।
आखिर में, 'दुल्हनिया ले आएगी' ऐसी फिल्म है जो बड़े प्रयोग नहीं करती, लेकिन अपने उद्देश्य में सफल रहती है। यह दर्शकों को हंसाती है, भावुक करती है और अंत में एक सुकून भरी मुस्कान के साथ थिएटर से बाहर भेजती है। सबसे बड़ी बात यह कि खुशाली कुमार इस फिल्म की सोल बनकर उभरती हैं। उनका अभिनय साबित करता है कि वह लगातार एक बेहतर और भरोसेमंद अभिनेत्री के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रही हैं। अगर आप एक साफ-सुथरी, पारिवारिक और मनोरंजक फिल्म की तलाश में हैं, तो 'दुल्हनिया ले आएगी' आपको निराश नहीं करेगी।
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