2007 में रिलीज हुई इमरान हाशमी की फिल्म 'आवारापन' ने पाकिस्तान में तहलका मचा दिया था। एक गैंगस्टर की रिडेंपशन स्टोरी पर बनी ये कल्ट फिल्म वहां रिलीज से पहले ही विवादों के घेरे में आ गई थी। लाल मस्जिद का फतवा, लाहौर कोर्ट में केस और सिनेमाघरों में सुसाइड बॉम्बिंग का खौफ – ये सबने फिल्म को सबसे विवादित बना दिया।
फिल्म की कहानी और पाकिस्तान कनेक्शन
'आवारापन' में इमरान हाशमी ने शिवम पंडित का किरदार निभाया था जो एक नास्तिक गैंगस्टर जो ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जाल में फंसी एक लड़की की जिंदगी बदल देता है। फिल्म का बड़ा हिस्सा हांगकांग, बैंकॉक, मॉस्को और लाहौर में शूट हुआ। ये उन रेयर भारतीय फिल्मों में शुमार है जो पाकिस्तानी लोकेशन पर बनी। प्रोडक्शन UAE की अल-आलम प्लास्टिक फैक्ट्री ने संभाला, लेकिन क्रेडिट्स में महेश-मुकेश भट्ट का नाम था। इमरान के करियर में ये फिल्म मील का पत्थर बनी, क्योंकि इसमें पहली बार उनका कोई किसिंग सीन नहीं था।
रिलीज से ठीक पहले एक पाकिस्तानी प्रोड्यूसर ने लाहौर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उनका तर्क था कि पाकिस्तान में भारतीय फिल्में और आर्टिस्ट्स पर आधिकारिक बैन है। लेकिन कल्चर मिनिस्ट्री और सेंसर बोर्ड ने जवाब दिया कि फिल्म UAE प्रोडक्शन है। डिस्ट्रीब्यूटर सोहेल खान ने अजमान चैम्बर्स का ओरिजिन सर्टिफिकेट पेश किया। बोर्ड के नियम के मुताबिक, भारत के बाहर बनी फिल्में रिलीज हो सकती हैं। कोर्ट ने रिलीज की इजाजत दे दी, लेकिन विवाद थमा नहीं है।
लाल मस्जिद का फतवा और आतंकी खतरा
फिल्म 6 जुलाई को रिलीज हुई, जो लाल मस्जिद ऑपरेशन सनराइज के बीच था। इस्लामाबाद की लाल मस्जिद शरीअत अदालत ने फतवा जारी कर दिया। मौलाना अब्दुल रशीद गाजी ने कहा कि फिल्म पाकिस्तानी भावनाओं को ठेस पहुंचाएगी इसमें 'हिंदू लड़के' (शिवम) और 'पाकिस्तानी लड़की' (मृणालिनी शर्मा) का कथित लव एंगल है, वो भी 'काफिरों' के साथ था। लाल मस्जिद उस वक्त आतंकी गतिविधियों का केंद्र थी – किडनैपिंग, हत्याएं और ऑपरेशन में 154 आतंकी मारे गए थे।
थिएटर्स में दर्शकों का डर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शोज में कम दर्शक आए क्योंकि लोग सुसाइड बॉम्बिंग से डर रहे थे। थिएटर मालिकों ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि चरमपंथी माहौल ने हॉल खाली कर दिए। विडंबना ये कि फिल्म गैंगस्टर के सुधार की बात करती है, लेकिन उसे हिंसा का शक हो गया। आज 'आवारापन' कल्ट स्टेटस रखती है, लेकिन पाकिस्तान वाला बवाल आज भी याद किया जाता है।