ग्लोबल आइकन प्रियंका चोपड़ा जोनास ने हाल ही में अपने करियर के सबसे बड़े फैसले पर खुलकर बात की। बॉलीवुड की चमक-दमक छोड़ हॉलीवुड की राह पकड़ने का सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे 'लिगेसी' बनाने के लिए चुना। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के इंडिया कॉन्फ्रेंस 2026 में उन्होंने बताया कि भारत में वे टॉप एक्ट्रेस थीं, फिर भी उन्होंने जोखिम उठाया।
प्रियंका ने कहा, "मैं भारत में अपने काम को लेकर बहुत कुछ झेल रही थी। मैं सर्वाइव करने की कोशिश कर रही थी। मेरा लक्ष्य था लिगेसी छोड़ना। यही सोचकर हर सुबह उठती और छोटे रोल करने जाती।" उन्होंने हॉलीवुड के शुरुआती दिनों का जिक्र किया, जहां ट्रेलर में तीन एक्टर्स के साथ छोटा रोल मिला। एक बार 15 घंटे इंतजार के बाद भी उनका शॉट कैंसल हो गया। भारत में ऐसा कभी नहीं हुआ था, लेकिन लॉन्ग टर्म गोल ने उन्हें हौसला दिया। प्रियंका ने यह भी साझा किया कि इस सफर में उन्होंने अपने युवा दिनों की गलतियों को माफ करना सीखा। उन्होंने कहा कि जब इंसान नए माहौल में जाता है तो कई बार गलत फैसले लेता है, लेकिन वही अनुभव उसे मजबूत बनाते हैं।
उनका सफर 2002 में तमिल फिल्म 'तमिलन' से शुरू हुआ। बॉलीवुड में 'दॉन', 'कृष', 'ऐतराज' जैसी हिट फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बनाया। 2015 में 'क्वांटिको' से हॉलीवुड डेब्यू किया, जो थ्रिलर सीरीज थी। उसके बाद 'बेवॉच', 'इज्न्ट इट रोमांटिक', 'लव अगेन' और 'हेड्स ऑफ स्टेट' जैसी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। प्रियंका ने माना कि भारत में करियर उथल-पुथल भरा था, लेकिन हॉलीवुड में क्लियर विजन था।
प्रियंका का यह खुलासा बॉलीवुड से हॉलीवुड तक के संघर्ष को दर्शाता है। शशि थरूर ने भी हार्वर्ड इवेंट में उन्हें 'रिमार्केबल' कहा और कहा कि उन्होंने भारत का नाम रोशन किया। आज वे न सिर्फ एक्ट्रेस, बल्कि प्रोड्यूसर और ग्लोबल लीडर हैं। उनका जज्बा युवाओं के लिए प्रेरणा है।
दिलचस्प बात यह है कि प्रियंका ने यह खुलासा हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में किया, जहां उन्होंने अपने करियर की चुनौतियों और उपलब्धियों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बॉलीवुड छोड़ने का फैसला आसान नहीं था, लेकिन वह चाहती थीं कि उनका काम सिर्फ एक स्टारडम तक सीमित न रहे, बल्कि एक स्थायी पहचान बनाए।