फिल्म- सिस्टम

फिल्म- सिस्टम
रेटिंग-3/5
कलाकार- सोनाक्षी सिन्हा, ज्योतिका, आशुतोष गोवारिकर और विजयंत कोहली।
निर्देशक- अश्विनी अय्यर तिवारी
प्लेटफॉर्म- प्राइम वीडियो
System Review: अश्विनी अय्यर तिवारी अपनी मीनिंगफुल फिल्मों जैसे नील बटे सन्नाटा, बरेली की बर्फी और पंगा जैसी शानदार फिल्मों के लिए जानी जाती हैं। एक बार फिर वह जबरदस्त क्राइम थ्रिलर 'सिस्टम' लेकर जाहिर हैं। लेकिन इस बार उन्होंने दस्तक सिनेमाहॉल में नहीं बल्कि ओटीटी पर दी हैं। फिल्म 22 मई से प्राइम वीडियो (Prime Video) पर रिलीज हो गई है। सिस्टम में सोनाक्षी सिन्हा (Sonakshi Sinha) और ज्योतिका (Jyothika) लीड रोल में हैं। वहीं आशुतोष गोवारिकर सरप्राइज पैकेज के रूप में फिल्म शामिल हैं। तो कैसी है ये कोर्टरूम ड्रामा चलिए जानते हैं।
फिल्म की कहानी
कहानी मशहूर वकील रवि उर्फ आशुतोष गोवारिकर की बेटी नेहा राजवंश (सोनाक्षी सिन्हा) की लाइफ के ईर्द-गिर्द बुनी गई है। नेहा के पिता रवि जाने माने वकील है। उनके सामने कोई टिक नहीं पाता है। इतना ही नहीं कोई खड़ा भी नहीं होना चाहता है। वहीं नेहा सभी की तरह अपने पिता के साथ काम करना चाहती है। लेकिन वे उसे अपने साथ काम नहीं करने देता जब तक वह अपनी काबिलियत से केस जीतकर खुदको साबित नहीं कर देती।
नेहा खुद को साबित करने निकल पड़ती है। इसी दौरान कहानी में सारिका यानी ज्योतिका की एंट्री होती है, जो एक स्टेनोग्राफर है और अपने व्हीलचेयर पर बैठे पति की देखभाल करते हुए अकेले ही घर और काम संभालती है। सारिका के ज्ञान से प्रभावित होकर नेहा उसे केसों में मदद करने के लिए पैसे देने का प्रस्ताव रखती है। जल्द ही दोनों एक मजबूत टीम बन जाती हैं और साथ मिलकर कई केस जीतती हैं, लेकिन एक केस में बाप-बेटी अदालत में आमने-सामने आ जाते हैं। इसके बाद जो होता है, वही फिल्म की असल कहानी है, जो आपको फिल्म देखने के बाद पता चलेगी।
निर्देशन
अश्विनी अय्यर तिवारी द्वारा निर्देशित यह फिल्म शुरू से ही दर्शकों को बांधे रखती है। दिल्ली में फिल्माई गई इस फिल्म की प्रामाणिकता शहर की असली सड़कों और जगहों पर फिल्माए गए सीन से और भी बढ़ जाती है। माहौल इतना सच सा लगता है कि आप सहजता से इसकी दुनिया से खुदको जोड़ पाते हैं। नेहा, उसके पिता और सारिका के बीच की केमिस्ट्री कहानी को दिलचस्प बनाए रखती है। फिल्म तब लड़खड़ाने लगती है, जब सोनाक्षी के किरदार को केस जीतने में सब कुछ बहुत आसानी से मिल जाता है, जिससे कहानी के कुछ हिस्से थोड़े फिल्मी लगते हैं। वहीं लास्ट में जो खुलासा होता है, वह कुछ हद तक इसे सही साबित करता दिखता है। लेकिन दिक्कत तब होती है जब अश्विनी की निर्देशन वाली कहानी में जगह-जगह कुछ हिंट से आगे की कहानी लीक करती चलती है, जिससे आपको अंदाजा लगने लगता है कि कहानी में आगे क्या होने वाला है। जब तक सच्चाई सामने आती है, तब तक शायद आपको पहले से ही अंदाजा हो चुका होता है। दूसरा पार्ट भी कई बार आपके धैर्य की परीक्षा लेता है, खासकर सोनाक्षी के किरदार। यह एक अच्छी कहानी की गति को धीमा कर देता है। वहीं डायलॉग में भी कहीं-कहीं कमी नजर आती है।
म्यूजिक
कबीर कथपालिया, अना रहमान और सवेरा का म्यूजिक ज्यादा इंट्रेस्टिंग नहीं लगता है। फिल्म से मेल नहीं करता है। कहानी ऐसी है कि फिल्म में गाने न होते तो भी काम चल सकता था।
कलाकार
एक्टिंग की बात करें तो, सोनाक्षी ने अच्छा काम किया है। एक पिता की नेम फेम के चलते अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही बेटी की उलझी हुई भावनाओं को बखूबी दिखाया है। ज्योतिका ने अपने परिवार और अपनी उम्मीदों को बचाए रखने के लिए जी-तोड़ कोशिश कर रही महिला के रूप में शानदार काम किया है। उनकी आंखों में थकावट और खामोश हार साफ झलकती है, जिससे उनका अभिनय दमदार बन जाता है।
देखें या नहीं
वहीं सिस्टम में सोनाक्षी के पिता का किरदार निभाने वाले आशुतोष गोवारिकर ने सभी को चौंका दिया है। पिता-बेटी के रिश्ते से जिस इमोशनल बॉन्ड और प्यार की उम्मीद की जाती है, वह दोनों के बीच गायब रहा है। ये कहा जा सकता है कि सिस्टम से उस तरह के रोमांच और उत्साह की उम्मीद न करें जो आमतौर पर इस कोर्टरूम ड्रामा से की जाती है। हां फिल्म वन टाइम वॉच है।
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