बॉलीवुड और टीवी जगत में इन दिनों भव्य और खर्चीली 'डेस्टिनेशन वेडिंग्स' का चलन है। हर कोई इटली या राजस्थान के किसी शाही महल में शादी करना चाहता है। लेकिन मशहूर अभिनेत्री कृतिका कामरा ने इस ट्रेंड को दरकिनार करते हुए एक बेहद सादा रास्ता चुना। हाल ही में गौरव कपूर के साथ शादी के बंधन में बंधीं कृतिका ने अब खुलासा किया है कि उन्होंने किसी विदेशी लोकेशन के बजाय अपने घर पर ही शादी करने का फैसला क्यों लिया।
दिखावे से दूर, अहसासों के करीब
कृतिका कामरा और गौरव कपूर ने 11 मार्च को गौरव के मुंबई स्थित आवास पर एक निजी रजिस्ट्री मैरिज की थी। कृतिका कामरा ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके लिए शादी का मतलब केवल रस्मों का कैलेंडर पूरा करना नहीं था। उन्होंने कहा, "सच कहूं तो हमारे लिए शादी (इवेंट) बड़ी बात नहीं थी, बल्कि विवाह (रिश्ता) बड़ी बात थी। हम शुरू से ही स्पष्ट थे कि हमें 3-4 दिनों की लंबी डेस्टिनेशन वेडिंग नहीं चाहिए।" अभिनेत्री के अनुसार, वे सुबह-शाम केवल रस्मों में बंधकर नहीं रहना चाहते थे, बल्कि उस पल को असल मायने में जीना चाहते थे।
अक्सर देखा जाता है कि अपनी ही शादी में दूल्हा-दुल्हन मेहमानों की खातिरदारी और फोटोग्राफी के चक्कर में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि वे खुद आनंद नहीं ले पाते। लेकिन कृतिका का अनुभव बिल्कुल अलग रहा। उन्होंने साझा किया, "मैंने अपनी शादी में जमकर मस्ती की क्योंकि हम किसी की मेजबानी नहीं कर रहे थे और न ही कहीं भाग रहे थे। कोई हमें यह कहने वाला नहीं था कि सूरज डूब रहा है तो जल्दी फोटो खिंचवाओ या अब एंट्री का समय हो गया है।" शादी में न तो कोई तय परफॉरमेंस थी और न ही कोई दिखावा। सब कुछ एक सहज प्रवाह (फ्लो) में हुआ, जहां परिवार के बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, हर कोई शामिल था।
कृतिका और गौरव ने दिसंबर 2025 में अपने रिश्ते को आधिकारिक बनाया था। शादी के एक महीने बाद अपने अनुभव साझा करते हुए कृतिका ने बताया कि शादी के बाद की जिंदगी में उन्हें कोई भारी बदलाव महसूस नहीं हुआ। चूंकि दोनों के अपने घर, करियर और रूटीन पहले से सेट थे, इसलिए यह उनके लिए दो जिंदगियों का एक स्वाभाविक मिलन जैसा था।
शादी के खुशनुमा पलों के बाद अब कृतिका कामरा वापस काम पर लौट आई हैं। वह जल्द ही बहुप्रतीक्षित प्रोजेक्ट 'मटका किंग' में नजर आने वाली हैं। उनकी यह सादगी भरी शादी उन लोगों के लिए एक मिसाल है जो मानते हैं कि शादी का मतलब सिर्फ भव्यता और शोर-शराबा होता है। कृतिका ने साबित कर दिया कि सबसे यादगार पल वे होते हैं जो अपनों के बीच शांति और सुकून से बिताए जाएं।