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KSBKBT 2: लीप के बाद बदली तुलसी की दुनिया, स्मृति ईरानी ने इमोशनल जर्नी पर की खुलकर बात

KSBKBT 2: स्टार प्लस के सबसे पसंदीदा शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी में आने वाला लीप कहानी को एक बेहद इमोशनल मोड़ देने वाला है। फैंस शो को काफी पसंद कर रहे हैं।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Dec 18, 2025 पर 4:45 PM
KSBKBT 2: लीप के बाद बदली तुलसी की दुनिया, स्मृति ईरानी ने इमोशनल जर्नी पर की खुलकर बात
लीप के बाद बदली तुलसी की दुनिया

KSBKBT 2: स्टार प्लस के सबसे पसंदीदा शो क्योंकि सास भी कभी बहू थी में आने वाला लीप कहानी को एक बेहद इमोशनल मोड़ देने वाला है। इस नए दौर में दर्शक तुलसी को एक ऐसे रास्ते पर चलते देखेंगे, जहां वह अपने घर, अपने परिवार और उस इंसान से दूर होगी, जिसे उसने बिना शर्त प्यार किया है। कहानी के इस अहम बदलाव पर अपनी बात रखते हुए, तुलसी का किरदार निभा रहीं स्मृति ईरानी ने बताया कि यह लीप उनके किरदार में कितनी गहराई और उलझने लेकर आता है।

लीप के बाद तुलसी की मेंटल स्टेटस पर बात करते हुए स्मृति ईरानी ने कहा, “तुलसी के जीवन के इस दौर को निभाना मेरे लिए बहुत अपना-सा है, क्योंकि इसमें मुझे उन कई महिलाओं की झलक मिलती है, जिनसे मैं अपने काम के दौरान सालों में मिली हूं। लीप के बाद तुलसी उस हर चीज़ से दूर हो जाती है, मिहिर, शांतिनिकेतन और उसकी जानी-पहचानी दुनिया जो कभी उसकी ज़िंदगी थी।

लेकिन यह सफर किसी ग़ुस्से या आरोप का नहीं है। यह एक ऐसी महिला की कहानी है, जो अपने अंदर की ताकत पर खड़ा होना सीखती है, धोखे को सम्मान के साथ सहती है और अकेले रहते हुए भी अपने जीवन को समझने की कोशिश करती है। मुझे तुलसी में उन महिलाओं की शांत मजबूती दिखती है, जो बदलते हालात में खुद को संभालती हैं, सहन करती हैं और फिर से अपनी ज़िंदगी बनाती हैं। यह अध्याय बताता है कि दूरी और चुप्पी के बीच भी एक महिला की ताकत, उसका आत्मसम्मान और दूसरों के लिए उसका प्यार कम नहीं होता बल्कि समय के साथ और मज़बूत होता जाता है।”

यह लीप तुलसी की ज़िंदगी का एक अहम मोड़ है, जहां आराम और अपनों के साथ रहने से ज़्यादा ज़रूरी बन जाती है भावनात्मक मजबूती। प्यार, बिछड़ने का दर्द और कई अनकहे सवालों के बीच तुलसी का सफर उसकी अंदरूनी ताकत और सही-गलत की समझ को सामने लाता है। यही खूबियां उसे हर पीढ़ी के दर्शकों से जोड़ती हैं। इस दौर में कहानी टकराव पर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, रिश्तों में आई दूरी और रिश्तों के बदलते मायनों पर ध्यान देती है। यह दिखाती है कि तुलसी कैसे चुपचाप हालात को समझती है और अपने अंदर की ताकत के सहारे आगे बढ़ती है।

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