Rani Mukerji: रानी मुखर्जी को भारतीय सिनेमा की सबसे सशक्त अभिनेत्रियों में से एक माना जाता है, जिनका लगभग तीन दशकों का करियर रहा है। 'मर्दानी 3' ने आज सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता एक्ट्रेस ने अपने जीवन के सबसे निजी और इमोशनल रूप से चुनौतीपूर्ण दौर के बारे में खुलकर बात की है और बताया है कि सिनेमा ने उन्हें इससे उबरने में कैसे मदद की।
पिंकविला के साथ एक बातचीत में, रानी ने स्टोरी को चुनने के अपने नजरिए पर विचार किया और खुलकर बताया कि 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' फिल्म उन्हें उस समय मिली जब वे मानिसक परेशानीयों से और दुख से गुज़र रही थीं। 2023 में रिलीज़ हुई इस फिल्म ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया और यह फिल्म उनके दूसरे बच्चे के मिसकैरिज के बाद के बेहद नाजुक दौर में आई थी।
इस बारे में बात करते हुए कि वह उन फिल्मों का चयन कैसे करती हैं, जो इंपैक्ट पैदा करती हैं और बातचीत को बढ़ावा देती हैं। रानी ने शेयर किया कि मिसेज चटर्जी बनाम नॉर्वे उनके साथ जुड़ गई है। उन्होंने खुलासा किया, "वो जो कहानी थी, वो फिल्म मेरे पास आई थी, जब मैंने मेरा दूसरा बच्चा खो दिया था। मुझे ये नुकसान का एहसास था। वो कहानी सुनके मैं इतना जुड़ गई और मैंने बोला ये कहानी मुझे बताती है।
फिल्म का इमोशनल सेंटर पॉइंट—एक मां का अपने बच्चे से बिछड़ना—रानी के अपने दुख को दर्शाता है, जिससे यह प्रोजेक्ट उनके लिए बेहद व्यक्तिगत बन गया। रानी के लिए, इस भूमिका को निभाना अपनी भावनाओं को समझने का एक तरीका बन गया, साथ ही उस कहानी पर प्रकाश डालने का भी, जिसे वह दिल से जानना चाहती थीं।
रानी ने आगे बताया कि व्यक्तिगत पीड़ा से उबरने के अलावा, इस फिल्म ने उन्हें समाज की व्यापक वास्तविकताओं को संबोधित करने का अवसर भी दिया। उन्होंने विदेशों में रहने वाले परिवारों के संघर्षों और ऐसी स्थितियों के भावनात्मक प्रभाव, विशेष रूप से माताओं पर पड़ने वाले असर के बारे में बात की।
उन्होंने कहा, “हिंदुस्तान को यह कहानी बतानी है और उन्हें बताना है कि हमारा जो जुनून है कि हम बाहर चले जाएं, हम वहां बस जाएंगे, ये सच्चाई नहीं है, सच्चाई बहुत हटके है। रानी ने कहा, "अपने बच्चों के बिना एक मां का क्या हाल होता है और आपका बच्चा आपसे लेके कोई चले जाए आपकी आंखों के सामने तो उस मां पे क्या गुजरती है, बच्चों पर क्या गुजरती है वो दिखाना था।