Mardaani 3 Movie Review: इस बार फीकी रही मर्दानी की दहाड़, क्लाइमैक्स ने उम्मीदों पर फेरा पानी

Mardaani 3 Movie Review: शिवानी शिवाजी रॉय के रूप में एक बार फिर रानी मुखर्जी धमाल मचाने सिल्वर स्क्रीन पर दस्तक दे चुकी हैं। फिल्म कैसी है...आप इसे देखें या नहीं चलिए आपको बताते हैं।

अपडेटेड Jan 30, 2026 पर 4:52 PM
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इस बार दिल जीतने में नकामयाब रहीं शिवानी शिवाजी रॉय उर्फ रानी मुखर्जी

फिल्म :मर्दानी 3

निर्देशक: अभिराज मीनावाला

कलाकार: रानी मुखर्जी, जानकी बोदीवाला, मल्लिका प्रसाद

रेटिंग: 2.5/5

Mardaani 3 Movie Review: अगर कॉमेडी और जासूसी थ्रिलर का यूनिवर्स हो सकता है तो मर्दानी का क्यों नहीं? पुलिस की फिल्मों से हमेशा रोहित शेट्टी का नाम ही जुड़ा है। लेकिन मर्दानी दो सफल फिल्में देकर रानी मुखर्जी ने इस धारणा को बदल दिया है। शिवानी शिवाजी रॉय का नाम लोगों के दिल और दिमाग पर छाया रहता है। इस फ्रेंचाइज़ की तीसरी कड़ी, मर्दानी 3 कॉन्फिडेंस के साथ बड़े पर्दे पर आ चुकी है।


फिल्म की कहानी

अभिराज मीनावाला द्वारा निर्देशित की गई इस फिल्म का तीसरा पार्ट शिवानी का रास्ता और भी ज्यादा चुनौतिपूर्ण दिखाता है। इस फिल्म में दिल्ली की गलियों में दो बच्चियों के लापता होने की जांच में जुटी शिवानी ऐसे राज से पर्दा उठाती है, जिसे देखकर हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। एक सामान्य गुमशुदगी का मामला खौफनाक केस का मोड़ ले लेता है। जांच के दौरान शिवानी का सामना होता है अम्मा (मल्लिका प्रसाद) से। वह एक मानव तस्करी नेटवर्क चलाती है, जो कम उम्र की लड़कियों को अपना शिकार बनाती है। बस यही से शुरू होता है असली खेल।

कलाकारों की एक्टिंग

मर्दानी 3 की बैकबोन इस बार रानी नहीं बल्की सरप्राइज पैकेज मल्लिका प्रसाद हैं। ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइज हमेशा विलेन को लेकर लाइम लाइट में रही है। मल्लिका ने उस विरासत को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ाया है। उसकी एंट्री परफॉर्मेंस इतनी खौफनाक है कि स्क्रीन पर वह जैसे ही आती है तो आप सिहर जाएंगे। सीधे दर्शकों के दिमाग पर असर डालती है। बात रानी मुखर्जी की करें तो इस बार एक्ट्रेस काफी फीकी रहीं। पिछले दो पार्ट्स में शिवानी के किरदार की जिस एनर्जी के लोग दीवाने थे, वह इस बार गायब रही। रानी और उनके डायलॉग कई सीन में बेहद नकली और खिचाउ लगते हैं। कई जगह उनका चिल्लाना और मारपीट करना साफ-साफ बनावटी दिखता है। उनकी पर्सनैलटी से मेल ही नहीं खाता है।

फिल्म का डायरेक्शन और सिनेमैटोग्राफी

फिल्म का डायरेक्शन अभिराज मीनावाला ने किया है। इस फिल्म को पहले से बेहतर बनाने में वह चूक गए। बेहतरी के चक्कर में उन्होंने ‘मर्दानी’ के रॉ और रियलिस्टिक फील को गवां दिया है। फिल्म का डायरेक्शन फीका है। वहीं ​​सिनेमैटोग्राफी करें तो कैमरापर्सन ने अपने काम में जान डाल दी है। भिखारी माफिया के ठिकाने और शहर के अंधेरे कोनों को शानदार तरीके से पेश किया है। लाइटिंग और फ्रेमिंग फिल्म को कहानी के हिसाब से माहौल दे पाती है।

कहां रह गई कमी

‘मर्दानी 3’ के क्लाइमैक्स ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। फर्स्ट हाफ और सेकेंड हाफ की शुरुआत एक्साइटेड करती है। लेकिन जैसे ही आप का थोड़ा इंट्रेस्ट बढ़ता, फिल्म ढीली पढ़ जाती है। फिल्म अपने क्लाइमैक्स तक पहुंचती है, सब कुछ जल्दी-जल्दी खत्म कर दिया जाता है। जिस इमोशनल गहराई उम्मीद करते हैं, उसे काम की तरह निपटा दिया गया है।

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