Paro Pinaki Ki Kahani: रोमांस नहीं बल्कि जिंदगी के कड़वे सच से रूबरू कराती है 'पारो पिनाकी की कहानी'

Paro Pinaki Ki Kahani: 'पारो पिनाकी की कहानी' आज यानी 6 फरवरी को रिलीज हो रही है। फिल्म कैसी है और इसे देखना चाहिए या नहीं चलिए आपको बताते हैं।

अपडेटेड Feb 06, 2026 पर 10:42 AM
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रोमांस नहीं बल्कि जिंदगी के कड़वे सच से रूबरू कराती है 'पारो पिनाकी की कहानी'

फिल्म का नाम-पारो पिनाकी की कहानी

निर्देशक- रूद्र जादौन

रेटिंग-3.5


कलाकार-इशिता सिंह, संजय बिश्नोई, हनुमान सोनी आदि

Paro Pinaki Ki Kahani: 'पारो पिनाकी की कहानी' आज यानी 6 फरवरी को रिलीज हो रही है। ये एक बेहद सच्ची, इमोशनल और दिल को छू लेने वाली एक सिंपल सी लव स्टोरी है, जो आम लोगों की लाइफ को झकझोर कर रख देती है। फिल्म की स्क्रीन में काफी दिग्गज लोग का जमावड़ा लगा था। फिल्म को काफी तारीफे भी मिली हैं।

फिल्म की कहानी एक सीवर साफ करने वाले लड़के और सब्जी बेचने वाली लड़की के ईर्द-गिर्द बुनी गई है, जो आपको इससे गहाराई से जोड़े रखती है। फिल्म में आपको किसी भी तरह का बनावटी रोमांस देखने को मिलेगा। ये मूवी आपको जिंदगी की कड़वी सच्चाइयों, दर्द और टूटती-बनती उम्मीदों को दिखाती है।

ट्रेन के सफर से शुरू हुआ यह प्यार धीरे-धीरे कब आपको अपने आघोश में ले लेगा आपको पता ही नहीं चलेगा। जहां हर छोटी-छोटी बातें गहरा असर छोड़ती हैं। एक सीवर साफ करने वाले की लाइफ का वो पहलू आपको देखने को मिलता है, जो सोच से भी परे है। फिल्म में संजय सिंह की बेटी इशिता सिंह लीड रोल में हैं।

मुंबई की एक स्लम बस्ती में अपने परिवार के साथ रहने वाली मरियम इशिता सिंह अपने अब्बा के साथ बाजार में सब्जी बेचती है , मरियम उर्फ पारो ( इशिता सिंह ) को पास की कालोनी में रहने वाले पिनाकी ( संजय बिश्नोई)जो सीवर की सफाई का काम करता है से ऐसा सच्चा प्यार होता है कि अपने घर से उसके लिए खाना लेकर उससे मिलने जाती है , मरियम के अब्बा को यह न मंजूर नहीं और वह अपनी बेटी को एक ऐसे मानव तस्करी करने वाले एक गिरोह को बेच देते है और मरियम अपने सच्चे प्यार से दूर घुट घुट कर जीने को मजबूर हो जाती है। वहीं अपने प्यार की तलाश मे अपना सब कुछ भूल पिनाकी उस बचा पाएगा। क्या उसकी तलाश कामयाब होती है, यह जानने के लिए आपको यह फिल्म देखनी होगी।

इशिता सिंह न सिर्फ लीड एक्ट्रेस हैं बल्कि प्रड्यूसर भी हैं, और उन्होंने अपनी एक्टिंग से साबित कर दिया है कि टैलेंट किसी तामझाम या बड़े प्रोडक्शन का मोहताज नहीं होता है। संजय बिश्नोई, हनुमान सोनीऔर बाकी कलाकारों ने अपने किरदारों में 100 फीसद दिया है, जबकि फिल्म का म्यूजिक इसकी सोल साबित होता है। रूद्र जादौन की राइटिंग और डायरेक्शन के साथ उन्होंने बताया कि सीमित संसाधन में भी दमदार फिल्म को कैसे तैयार किया जा सकता है।

डेढ़ घंटे की ये शानदार फिल्म आपको एक ऐसी दुनिया में ले जाती है, जो आपके बीच तो है पर आप उससे कोसो दूर हैं। फिल्म की एंडिंग आपको तालिया बजाने के साथ-साथ कई चीजों पर सोचने के लिए मजबूर कर देती है। यह फिल्म सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं बल्कि समाज का वो आइना है जिसे देखने से लोग कतराते हैं। 6 फरवरी को रिलीज हुई इस फिल्म को हर किसी को एक बार जरूर देखना चाहिए।

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