Prasanna Bisht: हाल ही में रिलीज़ हुई वेब सीरीज़ 'चिरैया'... सहमति और वैवाहिक रेप जैसे मुद्दों को उठाने के कारण इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है। समाज के एक वर्ग ने इस शो का विरोध करते हुए इसे 'एंटी मेन प्रोपेगेंडा' बताया है। शो में वैवाहिक रेप की शिकार महिला का किरदार निभाने वाले अभिनेता प्रसन्ना बिष्ट ने इन कमेंट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अब समय आ गया है कि लोग इस बदलाव को स्वीकार करना शुरू करें।"
प्रसन्ना बिष्ट आगे कहती हैं, “समय के साथ प्रकृति बदलती है, मौसम बदलता है, इसलिए हमें भी बदलना होगा। अब समय आ गया है कि हम सुनना शुरू करें । लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। यह शो सिर्फ यह समझाने के लिए है कि एक महिला का शरीर उसी का है और सहमति का क्या अर्थ होता है, बस इतना ही। अगर आपको लगता है कि यह प्रोपेगेंडा है, तो यह बेहद शर्मनाक और दुखद है। जो भी ऐसा कह रहा है, उसे पहले खुद को और शिक्षित करना चाहिए और अपनी भावनात्मक समझ विकसित करनी चाहिए और सुनना शुरू करना चाहिए।
ऑनलाइन ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि शो में दिखाया गया है कि 82% विवाहित भारतीय महिलाओं को अपने रिश्तों में दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ता है। इन आंकड़ों को झूठा बताते हुए प्रसन्ना कहती हैं, "लोग जो भी बातें कह रहे हैं, उन्हें पहले शो देखना चाहिए, उसके बाद ही कोई बयान देना चाहिए। आजकल लोग सच्चाई देखे बिना ही अपनी राय देने लगते हैं। शो में कभी भी उस प्रतिशत का दावा नहीं किया गया है जिसकी वे बात कर रहे हैं।
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें पर्दे पर उत्पीड़न के सीन को निभाने में कोई झिझक महसूस हुई, खासकर अपने करियर के इतने शुरुआती दौर में, तो प्रसन्ना ने कॉन्फिडेंस के साथ जवाब दिया- "इस दुनिया में ऐसे बहुत से पुरुष हैं जो किसी लड़की को परेशान करते समय उसकी उम्र तक नहीं देखते। फिर जब मैं इसके खिलाफ बोलना चाहती हूं तो मुझे अपनी उम्र क्यों देखनी चाहिए? मुझे यह कहते हुए गर्व होता है कि मैंने यह किया क्योंकि यह मेरी जिम्मेदारी थी। मैं जानती हूं कि मैं एक अभिनेत्री हूं, लेकिन यह एक जिम्मेदारी थी क्योंकि मैंने भी अपने जीवन में बहुत कम उम्र में ही ऐसी चीजों का अनुभव किया है।
अभिनेत्री का कहना है कि शो की कहानी भले ही काल्पनिक हो, लेकिन यह कई महिलाओं की हकीकत है। “जिन महिलाओं को मैं जानती हूं और जिनसे मैंने बात की है, उनमें से लगभग सभी ने अपने जीवन में इसका अनुभव किया है। मैंने खुद भी कई बार देखा है कि लोगों ने मेरी गरिमा को ठेस पहुंचाई है और अपनी हदें पार करने की कोशिश की है, सिर्फ इसलिए कि उन्हें लगता है कि वे ऐसा कर सकते हैं।
वह आगे बताती हैं कि यह सोचना आसान है कि वे ऐसा होते ही तुरंत आवाज क्यों नहीं उठातीं, लेकिन पीड़ित के मन में जो चल रहा होता है वह कहीं अधिक जटिल होता है। लोग सोचते हैं, ‘अरे, सिर्फ इसलिए कि वह कामकाजी महिला है, पढ़ी-लिखी है, वह अपने लिए आवाज़ क्यों नहीं उठा सकती?’ उन्हें समझ नहीं आता कि जब निजी भावनाएं, निजी रिश्ते शामिल हो जाते हैं तो क्या होता है। हमारे समाज में परवरिश ऐसी है कि अपेक्षाएं थोपी जाती हैं और सीमाएं तय हो जाती हैं।
यह पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही ऐसी परवरिश है कि महिलाओं को ऐसा ही होना चाहिए। हम सवाल करने लगते हैं, ‘क्या हमने कुछ गलत किया? क्या हमसे कोई गलती हुई?’ आवाज़ उठाने से पहले, मुझे यह समझने दो कि असल में क्या हुआ था, ताकि मैं कुछ गलत न कह दूं, ताकि रिश्ता खराब न हो जाए। महिलाओं के लिए खुद को समझना बहुत मुश्किल होता है। मेरे लिए भी यह समझना मुश्किल था कि क्या सही है और क्या गलत।”
वह आलोचकों से यह भी सवाल करती हैं कि उन्हें शो में दिखाए गए अच्छे पुरुष क्यों नहीं दिख रहे हैं। “कभी-कभी आप इतनी सारी मान्यताओं से इतने अंधे हो जाते हैं जो आपके पक्ष में काम नहीं कर रही होतीं कि आप खुद को उनसे मुक्त करना ही नहीं चाहते। लोग विनय के बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं? मुझे आश्चर्य है। लोग इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं कि उसने स्थिति को कैसे संभाला?
लोग इस बारे में बात क्यों नहीं कर रहे हैं कि उसने अपनी पत्नी का कैसे साथ दिया? वह कैसे अच्छे मूल्यों वाला एक सच्चा इंसान है। वे केवल अरुण ने क्या किया और शो में पुरुषों को कैसे दिखाया गया है, उसी के बारे में बात कर रहे हैं। यह सच नहीं है। शो में हमने विरोध दिखाया है। उन्हें अपनी आंखें, अपना दिमाग, अपना दिल खोलना होगा, ताकि वे बुनियादी मानवीय बातों को समझ सकें।