मूवी रिव्यू- राहु केतु
मूवी रिव्यू- राहु केतु
रेटिंग-4/5
कलाकार- पुलकित सम्राट, वरुण शर्मा, शालिनी पांडे, पीयूष मिश्रा, चंकी पांडे, अमित सियाल, मनु ऋषि चड्डा, सुमित गुलाटी
निर्देशक- विपुल विज
निर्माता- उमेश कुमार बंसल, सूरज सिंह, वर्षा कुकरेजा, प्रगति देशमुख
Rahu Ketu Review: इस सप्ताह सिनेमागृह में रिलीज फ़िल्म राहु केतु में पर्दे पर पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा साथ आते हैं, तो माहौल अपने आप हल्का और मज़ेदार हो जाता है—और ‘राहु केतु’ इसी स्टार जोड़ी के दम पर पहले ही सीन से दर्शकों को अपनी कामेडी से हसांती है। दोस्ती, सिचुएशनल कॉमेडी और जादुई अफरातफरी के साथ यह फिल्म आज के कॉमेडी ट्रेंड से अलग खड़ी नजर आती है। फ़िल्म के संवाद से अधिक सिचुएशन ज़्यादा हँसाती हैं।
कहानी
कहानी शुरू होती है हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से शहर में, जहां लेखक चूरू लाल शर्मा (मनु ऋषि चड्डा) अपनी किस्मत और कलम—दोनों से परेशान है। तभी उसकी ज़िंदगी में एंट्री होती है रहस्यमय फूफाजी (पीयूष मिश्रा) की, जिनके पास मौजूद एक जादुई किताब पूरी कहानी की दिशा बदल देती है। इस किताब से जन्म लेते हैं राहु और केतु, दो ऐसे किरदार जो मासूम भी हैं और मुसीबतों की जड़ भी। जहां-जहां ये पहुंचते हैं, वहां अफवाहें, डर और हंसी साथ-साथ चलने लगती है। शहर इन्हें अपशकुन समझने लगता है, जबकि दर्शकों के लिए यही सबसे बड़ा एंटरटेनमेंट पैकेज बन जाते हैं। इसी उथल-पुथल में मीनू (शालिनी पांडे) और अजीबोगरीब अपराधी मोर्देखाई (चंकी पांडे) की एंट्री कहानी को और रंगीन बना देती है।
अभिनय
वरुण शर्मा एक बार फिर साबित करते हैं कि कॉमेडी उनकी नैसर्गिक ताकत है। राहु के किरदार में उनका एक्सप्रेशन और टाइमिंग लगातार हंसाती है। पुलकित सम्राट केतु के रोल में सहज, चुलबुले और पूरी तरह फिट बैठते हैं। दोनों की जुगलबंदी फिल्म की जान है और कई सीन सिर्फ इन्हीं के भरोसे यादगार बन जाते हैं। शालिनी पांडे मीनू के रोल में ताजगी लाती हैं, जबकि पीयूष मिश्रा फूफाजी बनकर हर सीन में रहस्य और मज़ा घोलते हैं। चंकी पांडे का मोर्देखाई अलग ही लेवल का एंटरटेनमेंट है, थोड़ा डरावना, ज्यादा मज़ेदार। अमित सियाल, मनु ऋषि चड्डा और सुमित गुलाटी सपोर्टिंग रोल्स में कहानी को मजबूती देते हैं।
निर्देशन और तकनीकी
विपुल विज की यह पहली फिल्म होने के बावजूद आत्मविश्वास से भरी हुई लगती है। कॉमेडी जबरदस्ती ठूंसी हुई नहीं लगती, बल्कि सिचुएशन से निकलती है। कुछ जगह फिल्म थोड़ी लंबी महसूस होती है, लेकिन मज़ेदार किरदार उस कमी को संभाल लेते हैं। हिमाचल की लोकेशन फिल्म को विज़ुअली फ्रेश बनाती है और बैकग्राउंड स्कोर कहानी के मिज़ाज में घुला रहता है।
क्यों देखें फिल्म
‘राहु केतु’ उन फिल्मों में से है जो बस हंसाने और एंटरटेन करने आती है और इसमें कामयाब भी रहती है। पुलकित सम्राट–वरुण शर्मा की जोड़ी, रंगीन किरदार और हल्की जादुई कहानी इसे एक फन वॉच बनाते हैं। अगर आप थिएटर में हंसी और हल्के-फुल्के मसाले की तलाश में हैं, तो यह फिल्म आपको सिनेमागृह में देखनी चाहिए।
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