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Ramayana First Song Released: गणेश चतुर्थी पर रिलीज हुआ 'रामायणम्' का पहला गाना, 'जय जय राम' से गूंज उठा इंटरनेट

Ramayana First Song Released: रणबीर कपूर और साई पल्लवी की फिल्म 'रामायणम्' का पहला गाना 'जय जय राम' रिलीज हो गया है। इसे ए.आर. रहमान ने कंपोज किया है। वहीं डॉ. कुमार विश्वास ने इसके बोल लिखे हैं और अरिजीत सिंह- श्रेया घोषाल ने आवाज दी है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Sep 14, 2026 पर 11:28 AM
Ramayana First Song Released: गणेश चतुर्थी पर रिलीज हुआ 'रामायणम्' का पहला गाना, 'जय जय राम' से गूंज उठा इंटरनेट
नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी ‘रामायणम्’ में रणबीर कपूर श्री राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे।

Ramayana First Song Released: गणेश चतुर्थी के शुभ अवसर पर 'रामायणम्' के मेकर्स ने फिल्म का पहला गाना 'जय जय राम' रिलीज किया है। इसके साथ ही भगवान गणेश के आशीर्वाद से फिल्म के म्यूजिकल सफर की शुरुआत हो रही है। 'जय जय राम' बेहद सुकून देने वाला है। इसके बोल श्री राम की करुणा, रक्षा करने की भावना और धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाते हैं।

फिल्ममेकर और प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​ने कहा ने गाने लोकर कहा कि श्री राम 'रामायणम्' का केंद्र हैं और पीढ़ियों से वे हमारे मार्गदर्शक रहे हैं। मुश्किल समय में हम उनसे शक्ति पाते हैं। अनिश्चितता के पलों में हम उनके दिखाए रास्ते पर चलते हैं। खुशी के पलों में हम कृतज्ञता के साथ उन्हें याद करते हैं। 'जय जय राम' के जरिए हम चाहते थे कि हमारा पहला गाना श्री राम को सिर्फ एक पूजनीय देवता के तौर पर नहीं, बल्कि एक रक्षक, मार्गदर्शक और शक्ति के स्रोत के तौर पर दर्शाए।

ए.आर. रहमान ने कहा- "'जय जय राम' के केंद्र में श्री राम के नाम का सरल और शक्तिशाली है। संगीत के नजरिए से मकसद प्रार्थना की पवित्रता और अपनापन बनाए रखना था, साथ ही इसे एक सिनेमाई गाने का रूप भी देना था। अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने डॉ. कुमार विश्वास के शब्दों को अपने खास भावनात्मक अंदाज में पेश किया है।"

डॉ. कुमार विश्वास ने कहा- "'जय जय राम' तीन सरल शब्द हैं, फिर भी इनमें एक पूरी प्रार्थना समाई हुई है।" गाना लिखते समय मेरी कोशिश श्री राम का वर्णन करने की नहीं थी, क्योंकि उनके महत्व को शब्दों में नहीं बांधा जा सकता, बल्कि मेरा मकसद उस रिश्ते को जाहिर करना था जो हर भक्त का उनसे होता है—एक मार्गदर्शक, ताकत और शरणदाता के तौर पर। भाषा को सरल और सीधा रखा गया है क्योंकि सच्ची भक्ति को किसी सजावट की जरूरत नहीं होती।

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