Shraddha Kapoor ने अपनी अगली फिल्म के लिए तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें वो लावणी कलाकार के रोल में नजर आने वाली हैं। उन्होंने ‘छावा’ जैसी रिकॉर्ड तोड़ कमाई करने वाली फिल्म के डायरेक्टर लक्षमण उतेकर के साथ उनके अगले प्रोजेक्ट के लिए हाथ मिलाया है। लक्षमण की अगली फिल्म का नाम ‘ईथा’ है, जो प्रसिद्ध लावणी कलाकार विठाबाई नारायण गांवकर के जीवन पर आधारित बायोपिक है। इस फिल्म में श्रद्धा पहली बार रणदीप हुड्डा के साथ काम करेंगी। यह फिल्म अभी प्री प्रोडक्शन में है। लक्षमण उतेकर की बात करें, तो साल 2025 उनके लिए काफी अच्छा साबित हुआ। इस साल की शुरुआत में उनकी शिवाजी महाराज पर बनी उनकी फिल्म ‘छावा’ ने 800 करोड़ की कमाई की, जो एक रिकॉर्ड है। इस फिल्म में शिवाजी महाराज का किरदार विकी कौशल ने किया था।
फैंस को है श्रद्धा पर भरोसा
श्रद्धा कपूर विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन को बड़े परदे पर दिखाएंगी। विठाबाई जैसे व्यक्तित्व का किरदार निभाना श्रद्धा के करियर के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। लेकिन श्रद्धा कपूर के फैंस को विश्वास है कि वो इस फिल्म के जरिए विठाबाई के हिम्मत की अविश्वसनीय कहानी को देश और दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाएंगी। श्रद्धा कपूर के अपकमिंग प्रोजेक्ट्स में सबसे अहम नाम ‘स्त्री 3′ का है, जो अगस्त 2027 में रिलीज होगी। इसके अलावा, वो फैंटेसी ट्रिलॉजी की ‘नागिन’ में भी मुख्य भूमिका निभाएंगी।
नवंबर के अंत में शुरू होगी ‘ईथा’ की शूटिंग
प्रोजेक्ट से जुड़े एक सूत्र ने एक पोर्टल को बताया कि फिल्म ‘ईथा’ की शूटिंग इस महीने के अंत में मुंबई में शुरू होगी। रणदीप-श्रद्धा इस फिल्म के रोमांटिक लीड की भूमिका निभाएंगे। फिल्म की प्रोडक्शन टीम लीड जोड़ी को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं, क्योंकि रणदीप और श्रद्धा दोनों ही गहराई और बहुमुखी प्रतिभा वाले कलाकार हैं।
विठाबाई नारायणगांवकर महाराष्ट्र की सबसे प्रतिष्ठित लावणी कलाकारों में से थी। यह फिल्म उनकी असाधारण यात्रा पर आधारित है। जुलाई 1935 में सोलापुर जिले के पंढरपुर में जन्मी विठाबाई का परिवार पारंपरिक लोक प्रदर्शन में गहराई से जुड़ा था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत बचपन में की और लावणी और तमाशा थिएटर की दुनिया में एक प्रतिष्ठित शख्सियत बन गईं। अपने प्रभावशाली स्टेज परफॉर्मेंस, दमदार आवाज और ऊर्जावान प्रस्तुतियों के लिए जानी जाने वाली विठाबाई ने भारतीय लोक संस्कृति में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके लिए उन्हें 1957 और 1990 में दो नेशनल अवॉर्ड भी मिले।