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मुंबई यूनिवर्सिटी के सिलेबस में शामिल हुआ नाटक 'भूमिका', सचिन खेडेकर और क्षितिज पटवर्धन की आर्टवर्क को मिला ऐतिहासिक सम्मान

'भूमिका' को मुंबई यूनिवर्सिटी के TYBA (थर्ड ईयर बैचलर ऑफ आर्ट्स) के कोर्स में शामिल किया गया है। दिग्गज अभिनेता सचिन खेडेकर की 21 साल बाद रंगमंच पर वापसी कराने वाले इस नाटक को अपनी वैचारिक गहराई के कारण 'आधुनिक क्लासिक' का दर्जा मिला है।

Shradha Tulsyanअपडेटेड May 20, 2026 पर 2:02 PM
मुंबई यूनिवर्सिटी के सिलेबस में शामिल हुआ नाटक 'भूमिका', सचिन खेडेकर और क्षितिज पटवर्धन की आर्टवर्क को मिला ऐतिहासिक सम्मान

समकालीन भारतीय रंगमंच (Theatre) के लिए एक बेहद गर्व का पल सामने आया है। लेखक क्षितिज पटवर्धन के बहुचर्चित और प्रशंसित मराठी नाटक 'भूमिका' को मुंबई विश्वविद्यालय (University of Mumbai) के बैचलर ऑफ आर्ट्स (BA) के पाठ्यक्रम में शामिल कर लिया गया है। अब यूनिवर्सिटी के TYBA (थर्ड ईयर बैचलर ऑफ आर्ट्स) के छात्र इस नाटक को अपने सिलेबस के हिस्से के रूप में पढ़ेंगे और इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

यह फैसला किसी भी आधुनिक नाटक के लिए एक दुर्लभ और ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। इसने 'भूमिका' को सीधे एक 'आधुनिक क्लासिक' का दर्जा दे दिया है, जिसने न केवल व्यावसायिक रूप से सफलता के नए झंडे गाड़े, बल्कि साहित्यिक और बौद्धिक स्तर पर भी अपनी एक गहरी छाप छोड़ी।

आखिर क्यों चुना गया 'भूमिका' को?

मुंबई यूनिवर्सिटी के 'मराठी बोर्ड ऑफ स्टडीज' के अनुसार, आज के दौर में जहां पहचान, तर्कसंगतता, मानवता और ईमानदारी जैसे विषयों पर लगातार बहस हो रही है, वहां 'भूमिका' नाटक बेहद प्रासंगिक है। यह नाटक इंसानी मूल्यों को बहुत मजबूती से रेखांकित करता है और दर्शकों व पाठकों को अंदर तक सोचने पर मजबूर करता है।

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