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Vikram Bhatt: 'मुझे यहां नहीं मरना है', जेल में बिना इलाज तड़पे विक्रम भट्ट, साझा किया रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव

Vikram Bhatt: फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट ने उदयपुर जेल में बिताए अपने डरावने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि कैसे वह गंभीर बुखार और इलाज के अभाव में मौत के करीब महसूस कर रहे थे। उन्होंने जेल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए और बताया कि बिना थर्मामीटर और दवाइयों के बीच उन्होंने केवल प्रार्थना के दम पर उस कठिन समय को पार किया।

Shradha Tulsyanअपडेटेड Apr 15, 2026 पर 11:29 AM
Vikram Bhatt: 'मुझे यहां नहीं मरना है', जेल में बिना इलाज तड़पे विक्रम भट्ट, साझा किया रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव

बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट ने हाल ही में अपने जीवन के सबसे कठिन और डरावने समय का खुलासा किया है। उदयपुर की जेल में बिताए गए अपने दिनों को याद करते हुए भट्ट ने बताया कि कैसे एक रात वह गंभीर बीमारी और इलाज के अभाव में मौत के करीब महसूस कर रहे थे। एक भावनात्मक नोट के जरिए उन्होंने जेल की सलाखों के पीछे की उस कड़वी सच्चाई को दुनिया के सामने रखा है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं।

हाड़ कंपाने वाली वो रात और 'बेबस' शरीर

विक्रम भट्ट ने बताया कि जनवरी की कड़कड़ाती ठंड में जब वह उदयपुर सेंट्रल जेल की बैरक नंबर 10 में बंद थे, तब एक रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्होंने याद करते हुए लिखा, "जेल में घड़ियां नहीं होतीं, इसलिए मुझे वक्त का अंदाजा नहीं था। लेकिन मुझे याद है कि मैं अचानक तेज कंपकंपी के साथ जागा। मेरा शरीर आग की तरह तप रहा था।"

भट्ट के अनुसार, स्थिति इतनी खराब थी कि दो-दो कंबल ओढ़ने के बाद भी उनका शरीर ऐसे कांप रहा था जैसे उन्होंने कपड़े ही न पहने हों। उनकी हालत देख उनके पास सो रहे अन्य कैदियों ने मानवीयता दिखाते हुए अपने कंबल भी उन्हें दे दिए, लेकिन चार कंबलों के नीचे भी उनकी कंपकंपी बंद नहीं हुई।

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