Asha Bhosle Married Life: "मैं उन्हें मरा हुआ नहीं देख सकती", जब पति आर. डी. बर्मन के कमरे में कदम रखने से भी कांप गई थीं आशा भोसले

Asha Bhosle Married Life: आशा भोसले और आर. डी. बर्मन की प्रेम कहानी उनके अटूट प्रेम को दर्शाती है, जहां पति की मृत्यु के बाद आशा जी ने उन्हें मृत अवस्था में देखने से इनकार कर दिया था ताकि उनकी यादें हमेशा 'जिंदा' रहें। 92 साल की उम्र में आशा जी के निधन के साथ ही इस महान संगीत जोड़ी के एक भौतिक युग का अंत हो गया है, लेकिन उनके गीत आज भी इस रूहानी रिश्ते की गवाही देते हैं।

अपडेटेड Apr 12, 2026 पर 2:45 PM
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भारतीय संगीत जगत का एक सुनहरा अध्याय आज हमेशा के लिए शांत हो गया। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली आशा भोंसले (92) अब हमारे बीच नहीं रहीं। लेकिन उनकी मौत की खबर के साथ ही उस महान प्रेम कहानी की यादें ताजा हो गई हैं, जो संगीत के सात सुरों से शुरू होकर रूहानी जुड़ाव तक पहुंची थी आशा भोंसले और महान संगीतकार आर. डी. बर्मन (पंचम दा) की कहानी।

सुरों के बीच उपजा अटूट प्रेम

आशा और पंचम की मुलाकात किसी फिल्मी स्क्रीनप्ले से कम नहीं थी। जब वे पहली बार मिले, तो दोनों अपने-अपने जीवन के कठिन दौर और असफल शादियों के बोझ से जूझ रहे थे। लेकिन संगीत ने उन्हें करीब लाया। 1980 में जब दोनों ने शादी की, तो यह केवल दो इंसानों का मिलन नहीं था, बल्कि दो अलग-अलग संगीत शैलियों का संगम था। पंचम दा के प्रयोगधर्मी संगीत को अगर किसी ने सबसे बेहतर समझा, तो वह आशा ताई ही थीं। 'पिया तू अब तो आजा' से लेकर 'चुरा लिया है तुमने' तक, उनके हर गीत में उनके प्यार की खनक सुनाई देती थी।Asha Bhosle Married Life (1)

वह दर्दनाक रात


दोनों का साथ लंबा नहीं रहा। 4 जनवरी 1994 को जब पंचम दा ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तो आशा भोंसले पूरी तरह टूट गई थीं। उस वक्त का एक वाकया आज भी लोगों की आंखों में आंसू ला देता है। जब आर. डी. बर्मन का निधन हुआ, तो आशा भोंसले उनके कमरे में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाई थीं। उन्होंने भर्राई आवाज में कहा था, "मैं उन्हें मरा हुआ नहीं देख सकती, मैं उन्हें हमेशा जिंदा देखना चाहती हूं।" वह अपने जीवनसाथी की उस अंतिम शांति को स्वीकार करने को तैयार नहीं थीं। उनके लिए पंचम कभी नहीं मरे; वह उनकी धुन में, उनकी यादों में और उनके रियाज में हमेशा जीवित रहे।

संघर्ष के दिनों में बनी रहीं ढाल

आर. डी. बर्मन के करियर के आखिरी दौर में जब फिल्म इंडस्ट्री का रुख बदल रहा था और उन्हें काम मिलना कम हो गया था, तब आशा भोंसले उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी रहीं। उन्होंने न केवल एक पत्नी के रूप में उनका साथ दिया, बल्कि एक कलाकार के तौर पर भी उन्हें प्रेरित करती रहीं। पंचम दा के जाने के बाद भी, आशा ताई ने कभी उन्हें खुद से अलग नहीं होने दिया। वह अक्सर कहती थीं कि वह आज भी पंचम की पसंद की साड़ियां पहनती हैं और उनके कमरे को वैसा ही रखती हैं जैसा वह छोड़कर गए थे।Asha Bhosle Married Life (2)

एक युग का अंत

92 वर्ष की आयु में आशा भोंसले का निधन न केवल संगीत जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह उस महान प्रेम कहानी का भौतिक अंत भी है। पिछले कुछ समय से वह उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं, लेकिन उनके चेहरे की वह चिर-परिचित मुस्कान कभी कम नहीं हुई।

आज जब आशा ताई ने अपनी अंतिम सांस ली, तो संगीत प्रेमियों के मन में बस यही ख्याल है कि शायद स्वर्ग की किसी महफिल में पंचम दा अपनी हारमोनियम लेकर तैयार होंगे और आशा ताई फिर से वही सुर छेड़ेंगी "जब तक है जान, मैं गाती रहूंगी।" सुरों की यह रानी भले ही खामोश हो गई हो, लेकिन उनका और पंचम का प्यार उनकी अमर धुनों में हमेशा गूंजता रहेगा।

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