कौन हैं माधव गोपाल अग्रवाल? जिनके लोन विवाद में फंसे राजपाल यादव

राजपाल यादव 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस केस को लेकर चर्चा में हैं और फिलहाल उन्हें अंतरिम जमानत मिल चुकी है। यह विवाद उनकी फिल्म अता पता लापता के लिए माधव गोपाल अग्रवाल से लिए गए 5 करोड़ के कर्ज से जुड़ा है। फिल्म के फ्लॉप होने से वह रकम नहीं चुका सके

अपडेटेड Feb 18, 2026 पर 10:03 AM
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माधव अग्रवाल के मुताबिक, ये एक औपचारिक लोन था, निवेश नहीं।

बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव इन दिनों एक कानूनी विवाद को लेकर सुर्खियों में हैं। 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दीं और मामला इतना गंभीर हो गया कि उन्हें तिहाड़ जेल तक जाना पड़ा। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने 16 फरवरी को उन्हें अंतरिम जमानत दे दी, जिससे अस्थायी राहत मिली। हालांकि इस घटनाक्रम ने फिल्म इंडस्ट्री और फैंस के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि आखिर वो कारोबारी कौन है, जिससे राजपाल ने आर्थिक मदद ली थी और कैसे ये लेन-देन एक बड़े विवाद में बदल गया। फिलहाल ये मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है।

फ्लॉप फिल्म और बढ़ता कर्ज


दरअसल, राजपाल यादव ने अपनी फिल्म अता पता लापता के लिए 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई और कमाई न होने के कारण कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया। वक्त के साथ ब्याज बढ़ता गया और रकम 9 करोड़ तक पहुंच गई।

कौन हैं माधव गोपाल अग्रवाल?

ये रकम बिजनेसमैन माधव गोपाल अग्रवाल से ली गई थी, जो मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े हैं। उनका फिल्म इंडस्ट्री से सीधा संबंध नहीं है। वो केआर पल्प एंड पेपर्स लिमिटेड जैसी कंपनियों में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

मदद की गुहार और इमोशनल अपील

अग्रवाल ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनकी मुलाकात राजपाल से सांसद मिथिलेश कुमार कठेरिया के जरिए हुई थी। पहली मुलाकात में ही राजपाल ने फिल्म के लिए तुरंत फंड की जरूरत बताई। शुरुआत में अग्रवाल ने मना कर दिया, लेकिन बाद में अभिनेता की पत्नी राधा के लगातार अनुरोध और भावनात्मक संदेशों ने उन्हें मदद के लिए राजी कर लिया।

निवेश नहीं, साफ-साफ था लोन

माधव अग्रवाल के मुताबिक, ये एक औपचारिक लोन था, निवेश नहीं। समझौते में साफ लिखा गया था कि रकम फिल्म की सफलता या रिलीज से जुड़ी नहीं होगी। उन्होंने खुद अन्य स्रोतों से पैसे उधार लेकर ये राशि दी थी। उनका कहना है कि पर्सनल गारंटी और चेक के आधार पर यह स्पष्ट था कि ये उधार था, न कि किसी तरह का बिजनेस निवेश।

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