हाल ही में आशा भोसले की तबीयत को लेकर सामने आई अलग-अलग खबरों ने लोगों के बीच हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट को लेकर काफी कन्फ्यूजन पैदा कर दिया है। अक्सर लोग इन दोनों मेडिकल स्थितियों को एक जैसा समझ लेते हैं, लेकिन असल में ये दोनों अलग-अलग और बेहद गंभीर इमरजेंसी हैं। इस विषय को स्पष्ट करते हुए कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर वैभव मिश्रा ने आसान भाषा में बताया है कि दोनों में क्या अंतर होता है और ये शरीर पर कैसे असर डालते हैं। यह जानकारी इसलिए भी जरूरी हो जाती है क्योंकि गलत समझ की वजह से लोग कई बार शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है।
सही समय पर पहचान और तुरंत मेडिकल मदद मिलना जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए हार्ट से जुड़ी इन दोनों स्थितियों को समझना हर किसी के लिए जरूरी है।
हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली नसों में ब्लॉकेज हो जाता है। ऐसे में दिल की मांसपेशियों को ऑक्सीजन नहीं मिल पाती, लेकिन दिल की धड़कन कुछ समय तक चलती रहती है और मरीज होश में भी रह सकता है।
कार्डियक अरेस्ट कितना खतरनाक है?
कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक इलेक्ट्रिकल फेलियर की वजह से काम करना बंद कर देता है। इसमें हार्ट की धड़कन रुक जाती है और मरीज को तुरंत मदद की जरूरत होती है, वरना कुछ ही मिनटों में जान का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों के अनुसार कार्डियक अरेस्ट को हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि यह बिना किसी चेतावनी के अचानक हो सकता है। कई बार इसके पहले कोई स्पष्ट संकेत भी नहीं मिलते।
इन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें
अगर अचानक व्यक्ति गिर जाए, नब्ज न मिले, सांस लेने में दिक्कत हो, सीने में दर्द या जकड़न हो और अचानक कमजोरी महसूस हो तो यह कार्डियक अरेस्ट के संकेत हो सकते हैं।
ऐसी स्थिति में तुरंत CPR देना बेहद जरूरी होता है क्योंकि हर सेकंड कीमती होता है। साथ ही हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाना, धूम्रपान से बचना, तनाव कम करना और नियमित नींद लेना जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।