सेहत के साथ जेब पर भी बढ़ते वजन का बोझ, इससे कैसे मिलेगा छुटकारा? जानिए एक्सपर्ट से

भारत में बढ़ता मोटापा अब गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुका है। यह डायबिटीज और दिल की बीमारियों की जड़ बन रहा है। एक्सपर्ट बता रहे हैं कि सही लाइफस्टाइल, मेडिकल सपोर्ट और समय पर इलाज से इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है।

अपडेटेड Apr 21, 2026 पर 10:24 PM
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मोटापा सिर्फ स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, यह आर्थिक बोझ भी बनता जा रहा है।

पहले बच्चों का बचपन मैदान, दौड़-भाग और खेलकूद में गुजरता था। अब वही समय मोबाइल, टीवी और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बीत रहा है। साथ ही खान-पान की आदतें भी बदल गई हैं। ज्यादा कैलोरी वाला लेकिन कम पोषण वाला खाना आसानी से मिल जाता है। इसका असर अब साफ दिख रहा है। जो बीमारियां पहले उम्र बढ़ने पर होती थीं, अब वे युवाओं और बच्चों में भी दिखने लगी हैं।

लुपिन में इंडिया रीजन फॉर्मुलेशंस के प्रेसिडेंट राजीव सिबल कहते हैं, 'युवा पीढ़ी में बढ़ता मोटापा एक गंभीर संकट है। यह अब सिर्फ कुछ लोगों की समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। इसके पीछे बैठे रहने की आदत, ज्यादा स्क्रीन टाइम और खराब पोषण अहम कारण हैं।'

भारत में कितनी गंभीर समस्या है मोटापा


भारत में मोटापा और ज्यादा वजन अब भारी स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। हालिया आकलनों के अनुसार करीब 45 करोड़ भारतीय ओवरवेट या मोटापे के शिकार हैं। इसका मतलब कि लगभग हर तीन में से एक व्यक्ति इस समस्या से प्रभावित है। इसमें पुरुषों और महिलाओं दोनों की बड़ी हिस्सेदारी है।

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) के डेटा के मुताबिक, करीब 24% महिलाएं और 23% पुरुष ओवरवेट या मोटापे की कैटेगरी में आते हैं।

How obesity can lead to another chronic diseases

स्थिति और गंभीर इसलिए हो जाती है क्योंकि यह समस्या अब बच्चों और युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है। World Obesity Atlas 2026 के मुताबिक भारत में लगभग 4.1 करोड़ बच्चे (5 से 19 साल) ओवरवेट या मोटापे से प्रभावित हैं। हालिया विश्लेषण यह भी संकेत देते हैं कि 30 साल से कम उम्र के लोगों में वजन बढ़ने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है।

बदलती जीवनशैली और बढ़ती परेशानी

आज की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि बहुत कम हो गई है। लंबे समय तक बैठना, बाहर कम निकलना और प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाना... ये सब मिलकर वजन बढ़ने की बड़ी वजह बन रहे हैं।

इसी वजह से टाइप 2 डायबिटीज और दिल की बीमारी जैसी समस्याएं अब कम उम्र में ही देखने को मिल रही हैं। दुनिया भर के आंकड़े बताते हैं कि बच्चों और किशोरों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

मोटापा अकेले नहीं आता

मोटापा अपने साथ कई और बीमारियां भी लेकर आता है। जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारी। ये सभी आपस में जुड़े होते हैं और एक-दूसरे को और ज्यादा गंभीर बना देते हैं।

राजीव सिबल बताते हैं, 'मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग अलग-अलग नहीं हैं। ये एक ही चेन का हिस्सा हैं। वजन बढ़ने से इन सभी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।' इसलिए जरूरी है कि इन्हें अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ समझा और संभाला जाए।

सिर्फ डाइट से नहीं, समझ से होगा कंट्रोल

अक्सर लोग सोचते हैं कि कम खाना और एक्सरसाइज करना ही काफी है। लेकिन मोटापा इतना आसान मुद्दा नहीं है।

राजीव सिबल के मुताबिक, 'मोटापा एक जटिल और लंबे समय तक रहने वाली स्थिति है। इसे सिर्फ इच्छाशक्ति से नहीं, बल्कि सही मेडिकल समझ और लगातार देखभाल से कंट्रोल किया जा सकता है।'

हमारे शरीर में भूख और फैट को कंट्रोल करने की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है। इसलिए इसका इलाज भी लंबे समय तक और सही तरीके से करना जरूरी होता है।

सेहत के साथ जेब पर भी असर

मोटापा सिर्फ स्वास्थ्य की समस्या नहीं है, यह आर्थिक बोझ भी बनता जा रहा है। इलाज पर खर्च बढ़ता है, काम करने की क्षमता कम होती है। इससे व्यक्ति और देश दोनों की उत्पादकता प्रभावित होती है।

अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में इसका असर और बड़ा हो सकता है।

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भारत में छिपा हुआ खतरा

भारत में मोटापे की समस्या थोड़ी अलग तरह से सामने आती है। यहां खाना सिर्फ जरूरत नहीं, बल्कि भावनाओं और संस्कृति से भी जुड़ा होता है।

राजीव सिबल कहते हैं, 'भारत में लोग तब तक खुद को ठीक मानते रहते हैं, जब तक कोई बड़ी बीमारी सामने नहीं आ जाती। इस दौरान शरीर के अंदर खतरा धीरे-धीरे बढ़ता रहता है।' यानी बीमारी चुपचाप बढ़ती है और पता तब चलता है जब स्थिति गंभीर हो जाती है।

इलाज में नई उम्मीद

अब मेडिकल साइंस ने मोटापे के इलाज में नई दिशा दी है। जीएलपी-1 आधारित दवाएं जैसे सेमाग्लुटाइड और टिरजेपेटाइड वजन कम करने में मदद कर रही हैं।

लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि ये दवाएं अकेले काम नहीं करतीं। सही डाइट, जीवनशैली में बदलाव और डॉक्टर की निगरानी के साथ ही इनका असर बेहतर होता है।

मिलकर करना होगा काम

मोटापे से निपटने के लिए एक टीम की जरूरत होती है... डॉक्टर, न्यूट्रिशनिस्ट और काउंसलर सभी का रोल जरूरी है।

राजीव सिबल का कहना है, 'सिर्फ जानकारी होने से कुछ नहीं बदलता। लोगों को लगातार सपोर्ट और गाइडेंस चाहिए, ताकि वे अपनी आदतों को लंबे समय तक बदल सकें।' डिजिटल टूल्स, पर्सनल कोचिंग और नियमित फॉलोअप इसमें मदद कर सकते हैं।

मोटापे को हल्के में लेना सही नहीं

मोटापा एक ऐसी समस्या है, जो धीरे-धीरे बढ़ती है लेकिन असर बहुत बड़ा डालती है। इसे हल्के में लेना अब संभव नहीं है।

अगर समय पर पहचान हो, सही इलाज मिले और लगातार ध्यान रखा जाए, तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। अब सिर्फ जागरूकता नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ रखा जा सके।

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